सरायपाली – पुराना टैक्सी स्टैंड के पास शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण के मामले में तहसीलदार सरायपाली ने सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत जारी आदेश में संबंधित व्यक्ति को अवैध कब्जा और निर्माण स्वयं हटाने के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं हटाने पर प्रशासन राजस्व अमले और पुलिस बल की मदद से अतिक्रमण हटाएगा।
मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में दायर डब्ल्यूपीसी क्रमांक 3818/2026 से जुड़ा है। उच्च न्यायालय के 23 जुलाई 2026 के आदेश के पालन में जिला कलेक्टर के माध्यम से प्राप्त निर्देशों के आधार पर 3 सितंबर को मौके का निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण के दौरान पंचनामा तैयार कर जांच प्रतिवेदन तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किया गया।
7.453 हेक्टेयर शासकीय भूमि, 798 वर्गफीट में मिला निर्माण
जांच में सरायपाली के खसरा नंबर 777 की कुल 7.453 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में शासकीय आबादी मद के रूप में दर्ज पाई गई। यह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के कार्यालय भवन से संबंधित क्षेत्र में स्थित है।
हल्का पटवारी की रिपोर्ट के अनुसार लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता भुजरंग साय पैकरा द्वारा परिवार सहित वर्ष 2009 से उक्त शासकीय भूमि पर निवास किए जाने का उल्लेख है।
निरीक्षण के दौरान पुराने कार्यालय भवन के समीप करीब 798 वर्गफीट क्षेत्र में अनाधिकृत निर्माण पाए जाने की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट में डीपीसी, कॉलम और दीवार समेत अन्य निर्माण का उल्लेख है। इसके अलावा मौके पर करीब दो फीट अतिरिक्त हिस्से में एस्बेस्टस शेड का विस्तार तथा डीपीसी के ऊपर करीब सात फीट ऊंची दीवार बनाए जाने की जानकारी भी दर्ज की गई।
ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका पक्ष
तहसीलदार के आदेश के अनुसार सुनवाई के दौरान अनावेदक की ओर से अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर खसरा नंबर 777 की शासकीय भूमि के 798 वर्गफीट क्षेत्र में किए गए नवीन अनाधिकृत अतिक्रमण और अवैध निर्माण को हटाने का आदेश दिया गया है।
17 सितंबर तक खुद हटाना होगा कब्जा
आदेश के तहत भुजरंग साय पैकरा को 17 सितंबर 2026 तक सात दिनों के भीतर निर्माण सामग्री सहित अवैध निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो राजस्व अमले द्वारा पुलिस बल की सहायता से कब्जा हटाकर शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराया जाएगा। प्रशासन की इस कार्रवाई में आने वाला पूरा खर्च और इसकी जिम्मेदारी अनावेदक की होगी।



