घने जंगल और हाथी आवागमन वाला क्षेत्र है तारा ब्लॉक, नीलामी को अडानी कंपनी से जोड़ते हुए कांग्रेस ने जारी किया बयान
रायपुर – हसदेव-अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है. नीलामी को अडानी कंपनी से जोड़ते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस नीलामी का विजेता कौन है इसमें कोई रहस्य नहीं है. कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को पर्यावरण विनाश का उदाहरण बताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस का दावा है कि तारा कोल ब्लॉक का बड़ा हिस्सा घने जंगल से घिरा है और यहां खनन शुरू होने से लाखों पेड़ों की कटाई के साथ हाथियों के आवागमन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.
इस तरह से अडानी इंटरप्राइजेस का आया नाम
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार ने जैव विविधता से भरपूर हसदेव अरण्य इकोसिस्टम में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी की है. कांग्रेस के मुताबिक, इस नीलामी में विजेता कंपनी CG Syn-Gas and Chemicals Limited है, जो Mundra Synenergy Limited की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी है. वहीं Mundra Synenergy Limited खुद Adani Enterprises Limited की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है.
2022 में विधानसभा ने पारित किया था प्रस्ताव
कांग्रेस ने तारा ब्लॉक की नीलामी के विरोध में छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रस्ताव का भी हवाला दिया है. जयराम रमेश के मुताबिक, 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव अरण्य में किसी भी नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक की मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट में भी दिया गया था हलफनामा
कांग्रेस का कहना है कि 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया था कि हसदेव अरण्य में किसी नई खदान के आवंटन या विकास की आवश्यकता नहीं है. कांग्रेस अब सवाल उठा रही है कि इन परिस्थितियों के बावजूद तारा कोल ब्लॉक की नीलामी कैसे हुई.
40 ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया से गए थे हटाए
जयराम रमेश ने अपने बयान में दावा किया कि 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉक्स को नीलामी प्रक्रिया से डीनोटिफाई कर दिया था. कांग्रेस का सवाल है कि जब तारा कोल ब्लॉक को पहले नीलामी प्रक्रिया से बाहर किया गया था, तो अब दोबारा इसकी नीलामी क्यों की गई.
तारा रिवाइज्ड’ नाम पर भी सवाल
कांग्रेस ने तारा ब्लॉक का नाम बदलकर ‘तारा (रिवाइज्ड)’ किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं. जयराम रमेश का कहना है कि नाम बदलने से जमीन पर पड़ने वाला पर्यावरणीय प्रभाव नहीं बदल जाता.
5 हजार एकड़ में फैला ब्लॉक, घने जंगल और हाथी आवागमन क्षेत्र
कांग्रेस के मुताबिक तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. इसमें 4 हजार एकड़ से ज्यादा हिस्सा घने जंगल का बताया गया है. कांग्रेस का दावा है कि खनन के लिए 10 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई हो सकती है. तारा में खनन को लेकर कांग्रेस ने हाथियों के आवागमन पर भी गंभीर चिंता जताई है. कांग्रेस का कहना है कि तारा ब्लॉक लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास स्थित है और यहां खनन होने से हाथियों के आवाजाही के रास्ते प्रभावित हो सकते हैं.
जैव विविधता पर भी खतरे का दावा
कांग्रेस के अनुसार, हसदेव अरण्य क्षेत्र कई वन्यजीवों और अन्य प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है. तारा में खनन से इन प्रजातियों पर अतिरिक्त खतरा पैदा हो सकता है. कांग्रेस ने इनमें कुछ प्रजातियों के पहले से ही गंभीर रूप से संकटग्रस्त होने का दावा किया है.
मुआवजा वनीकरण पर भी सवाल
जयराम रमेश ने कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन यानी जंगल की कटाई के बदले दूसरे स्थान पर पेड़ लगाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि प्राकृतिक और विशाल वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई महज दूसरे स्थान पर पेड़ लगाने से नहीं की जा सकती.
15 साल से जारी है स्थानीय विरोध
कांग्रेस ने दावा किया है कि स्थानीय आदिवासी और अन्य समुदाय पिछले करीब 15 वर्षों से हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए आंदोलन करते रहे हैं. ग्राम सभा के प्रस्तावों से लेकर जन अभियानों, धरनों और विरोध मार्च तक के जरिए जंगल और उससे जुड़ी आजीविका की सुरक्षा की मांग उठाई जाती रही है. इन आंदोलनों में रायपुर तक निकाला गया मार्च भी शामिल है.
कांग्रेस के सवाल
- जब 2022 में विधानसभा ने हसदेव में नई खदानों की नीलामी रोकने का प्रस्ताव पारित किया, तो तारा की नीलामी क्यों हुई?
- जब 2023 में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नई खदान की जरूरत नहीं होने की बात कही, तो फिर तारा ब्लॉक आगे कैसे बढ़ा?
- जब तारा समेत 40 ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया से डीनोटिफाई किए गए थे, तो दोबारा नीलामी क्यों की गई?
- ‘तारा (रिवाइज्ड)’ नाम दिए जाने के पीछे क्या वजह है?
- 4 हजार एकड़ से ज्यादा घने जंगल और लाखों पेड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव की भरपाई कैसे होगी?
- खनन से लेमरू क्षेत्र के हाथियों के आवागमन पर पड़ने वाले असर को कैसे रोका जाएगा?
फिलहाल तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है. कांग्रेस ने जहां इसे हसदेव-अरण्य और उसकी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बताया है, वहीं अब नजर इस बात पर है कि केंद्र और राज्य सरकार कांग्रेस के इन आरोपों और सवालों पर क्या जवाब देती हैं.



