बिलासपुर – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल संस्थान के चेयरमैन रविशंकर महाराज की याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने उनके संबंध में 28 जून 2025 के टेलीफोन इंटरसेप्शन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय के 4 जुलाई 2025 के पुष्टि आदेश और 15 सितंबर 2025 की रिव्यू कमेटी की कार्यवाही को कानून के अनुरूप नहीं पाते हुए निरस्त कर दिया।
CBI ने 30 जून 2025 को दर्ज की FIR
दरअसल मामला सीबीआई की 30 जून 2025 की FIR से जुड़ा है, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों, एनएमसी सदस्यों, बिचौलियों और निजी मेडिकल कॉलेजों के बीच कथित साजिश, रिश्वत, घोस्ट फैकल्टी, फर्जी मरीज और निरीक्षण रिपोर्ट में कथित छेड़छाड़ के आरोप हैं। याचिकाकर्ता का नाम भी एफआईआर में शामिल है।
इंटरसेप्शन कार्रवाई कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय और दूरसंचार विभाग से हलफनामा मंगाकर इंटरसेप्शन आदेश की पुष्टि और रिव्यू कमेटी की मंजूरी की वैधानिक प्रक्रिया की जांच की। रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद कोर्ट ने माना कि, याचिकाकर्ता से संबंधित इंटरसेप्शन कार्रवाई कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरती।
भ्रष्टाचार का आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार
हालांकि कोर्ट ने FIR, चार्जशीट, समन आदेश और रायपुर की विशेष अदालत में लंबित भ्रष्टाचार के आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुकदमा ट्रायल रिकॉर्ड पर उपलब्ध अन्य वैध और ग्राह्य साक्ष्यों के आधार पर जारी रहेगा और ट्रायल कोर्ट हर साक्ष्य की स्वीकार्यता, प्रासंगिकता व प्रमाणिकता का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करेगा।
प्राप्त संदेशों की प्रतियां नष्ट करने का निर्देश
साथ ही, यदि कोई कानूनी बाधा नहीं हो तो निरस्त इंटरसेप्शन आदेश के आधार पर प्राप्त संदेशों की प्रतियां नष्ट करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट में प्रत्येक निर्धारित तारीख पर उपस्थित होकर सुनवाई में सहयोग करने और अनावश्यक स्थगन नहीं लेने को भी कहा गया है।






