धमतरी – भगवान जगन्नाथ के अनसर (अस्वस्थ होने) की परंपरा के तहत पिछले चार दिनों से औषधीय काढ़े का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप वितरण किया जा रहा है. अंतिम दिन काढ़ा लेने के लिए मंदिर से करीब 100 मीटर तक भक्तों की लंबी कतार लग गई. मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के जयकारों से गूंज उठा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान का प्रसाद ग्रहण किया.
धमतरी की अनोखी परंपरा
मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं. इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए विभिन्न आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से तैयार सैकड़ों लीटर औषधीय काढ़ा भगवान को अर्पित किया जाता है. भोग के बाद यही काढ़ा भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. इस वर्ष काढ़ा वितरण के दौरान सिर्फ धमतरी ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे.
जगदीश मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष किरण गांधी ने बताया कि रथयात्रा महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार महाप्रसाद की व्यवस्था भी बढ़ाई गई है. रथयात्रा के दिन करीब 900 किलो चना और 300 किलो मूंग का प्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा.
महापौर रामू रोहरा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के काढ़ा प्रसाद की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. श्रद्धालु पूरे विश्वास और आस्था के साथ काढ़ा ग्रहण करते हैं. इस बार अंतिम दिन भक्तों की भारी भीड़ यह साबित करती है कि भगवान जगन्नाथ के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है.
श्रद्धालुओं में उत्साह
काढ़ा लेने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि भगवान के स्वस्थ होने की कामना के साथ अर्पित यह आयुर्वेदिक काढ़ा प्रसाद के रूप में ग्रहण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उनका विश्वास है कि भगवान जगन्नाथ का यह प्रसाद रोग-कष्ट दूर करता है, परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनाए रखता है. श्रद्धालुओं ने भगवान से सभी के स्वस्थ, सुखी और मंगलमय जीवन की कामना की.
रथयात्रा महोत्सव को लेकर पूरे धमतरी में भक्तिमय माहौल बना हुआ है और भगवान जगन्नाथ के दर्शन व प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है.






