इंडोनेशिया – प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं। आज इंडोनेशिया की सरकार ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया। इसके बाद पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया और दोनों देशों की साझा संस्कृति और विरासत पर बात की। साथ ही भविष्य में दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं पर भी अपने विचार रखे। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ‘आज सुबह मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पाने का भी सम्मान पाने का मौका मिला। मैं इसके लिए कोटि-कोटि भारतीयों की तरफ से इंडोनेशिया को शुभकामनाएं देता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया में उनका जिस तरह से स्वागत किया, उसे वे कभी भूल नहीं सकते। यह दोनों देशों की लोकतांत्रिक विरासत, साझा संस्कृति और दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है।’
पीएम मोदी के भाषण की अहम बातें
पीएम मोदी ने कहा, ‘आज भारत और इंडोनेशिया इतिहास के अहम मोड़ पर खड़े हैं। आने वाले 25 साल दोनों देशों के लिए अहम हैं। आज इंडोनेशिया की महान धरती से मैं आपके सामने दोनों देशों के साझा विकास का विश्वास लेकर आया हूं। मैं संकल्प लेकर आया हूं कि भारत और इंडोनेशिया पूरी दुनिया को नई ऊर्जा से भर देंगे।
‘भारत, दुनिया का वो देश है, जो विस्तारवाद नहीं विकासवाद की नीति पर चलता है। इसलिए हम भारत में कहते हैं सबका साथ, सबका विकास। आज मैं यही मंत्र, यही भावना लेकर इंडोनेशिया के आप सभी सांसद सदस्यों के बीच आया हूं। दोनों देशों के बीच भले ही हजारों किलोमीटर की दूरी है, लेकिन दोनों देशों के बीच समुद्र में सिर्फ 150 किलोमीटर की ही दूरी है। भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र दूरी का नहीं, बल्कि सेतु का प्रतीक है। ये हमारे साझा भविष्य का केंद्र है।’
‘इंडिया, एशिया और हिंद महासागर हमारे आपसी जुड़ाव की गवाही देते हैं। हजारों वर्षों तक भारत और इंडोनेशिया के बीच जुड़ाव रहा है। मैं आपसे भारत-इंडोनेशिया के संबंधों को नई ऊंचाई देने की अपील करता हूं। इंडिया और इंडोनेशिया सिर्फ समुद्र ही साझा नहीं करते बल्कि हमारा इतिहास भी साझा करते हैं। हमारा संबंध रामायण-महाभारत काल से है। हमारा संबंध नालंदा के ज्ञान से है, हमारा संबंध संगीत और नृत्य से है। हम विभिन्न ऐतिहासिक स्मारकों के जरिए जुड़े हैं। हम बाली जात्रा के उत्सव और उसके उल्लास से जुड़े हैं और स्वाद से भी जुड़े हैं।’
पीएम मोदी ने कहा, ‘कहा जाता है कि सदियों से पहले गुजरात से कुछ व्यापारी और सूफी संत समुद्र के रास्ते ही इंडोनेशिया आए थे। वे अपने साथ इस्लाम के विचार और इस्लाम के जीवन मूल्य भी लेकर आए। आज भी इंडोनेशिया की कला में उनकी छाप दिखाई देती है। इसलिए राष्ट्रपति सुकर्णों ने भी कहा था भारत और इंडोनेशिया के लोग रक्त और संस्कृति के संबंधों से जुड़े हैं।’
‘हम लोगों ने लंबे समय तक विदेशी शासन का सामना किया है। हम दोनों देश एक ही समय स्वतंत्र हुए। आजाद देश के तौर पर संप्रभुता की बात आती है तो भारत संयुक्त राष्ट्र में इंडोनेशिया की आजादी की लड़ाई की मजबूत आवाज बना। उस दौर में बीजू पटनायक ने जो भूमिका निभाई। उससे दोनों देश और करीब आए।’
पीएम मोदी ने कहा, ‘इसके अलावा हमें जो करीब लाता है वो है हमारा मजबूत लोकतंत्र और विविधता भरा लोकतंत्र है। भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं और इंडोनेशिया तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारत की तरह इंडोनेशिया में भी सैंकड़ों भाषाएं और परंपरा हैं। हम दोनों ने अपने लोकतंत्र में इस विविधता को अपनी एकता की नींव बना लिया है।’
‘1950 में जब भारत ने पहला गणतंत्र दिवस मनाया था, उसमें पहले मुख्य अतिथि राष्ट्रपति सुकर्णों ही थे। राष्ट्रपति सुकर्णों और पंडित नेहरू ने कहा था कि आजाद देशों को अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है।’
‘आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। हमारे यहां भी पिछले एक दशक में 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय गरीबी से बाहर आए हैं। इसलिए जब भारत और इंडोनेशिया साथ खड़े होते हैं तो दुनिया का विश्वास मजबूत होता है कि लोकतंत्र अवसर देता है, लोकतंत्र विश्वास देता है और लोकतंत्र भविष्य बनाता है। मुझे अटूट विश्वास है कि हमारी साझा आकांक्षाएं भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।’
‘भारत में हम विकसित भारत 2047 का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। अपने लक्ष्यों को हासिल करने में हम एक दूसरे के सहयोगी बन सकते हैं। हम दुनिया की सबसे युवा आबादी हैं और दुनिया की तेजी से आगे बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। हम दोनों बड़ी समुद्री ताकत हैं और हम वैश्विक दक्षिण की आवाज भी हैं। हम प्राचीन सभ्यताएं भी हैं और भविष्य के प्राकृतिक साझेदार भी हैं। हमें एक दूसरे का साझेदार और एक दूसरे की ताकत बनना होगा। भारत और इंडोनेशिया में जो सद्भाव और विश्वास है, हमें उसे अपने नागरिकों के लिए अवसरों में बदलना है।’






