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गरियाबंद: मैनपुर के डुमाघाट में बिहान दीदियों ने लाख की खेती से बदली तकदीर, सालाना लाखों की कमाई बिचौलियों से मुक्ति, सीधे फैक्ट्री तक पहुंच रहा उत्पाद – 700-800 रु/किलो मिल रहा दाम

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गरियाबंद – मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत डुमाघाट की महिलाएं लाख की खेती से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। कोसुम के पेड़ों पर लाख उत्पादन कर ये महिलाएं हर साल लाखों रुपए कमा रही हैं। बिहान मिशन से जुड़ी दीदियों की इस पहल ने गांव को पूरे जिले में “लाख उत्पादन क्षेत्र” की पहचान दिला दी है।

50 दीदियां, 60 क्विंटल उत्पादन का अनुमान
जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर के मार्गदर्शन और FPO के सीईओ युवराज नागेश के नेतृत्व में सुरभि महिला संकुल संगठन अमलीपदर के तहत गठित उन्नति महिला उत्पादक समूह, कांडसर की लगभग 50 महिलाएं बड़े पैमाने पर लाख की खेती कर रही हैं। वर्तमान में 50 से 60 क्विंटल लाख उत्पादन का अनुमान है। लाख का उत्पादन चक्र करीब 6 माह का होता है।

700-800 रुपए किलो भाव, धान से ज्यादा मुनाफा
वर्तमान बाजार में लाख का मूल्य 700 से 800 रुपए प्रति किलो है। समूह की महिलाएं लाख बीज, दाना व अन्य उत्पाद बेचकर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। धान की खेती के अलावा लाख उत्पादन अब क्षेत्र की महिलाओं के लिए आय का प्रमुख स्रोत बन गया है।

बिचौलियों से मिली आजादी, सीधे फैक्ट्री तक मार्केट
पहले कांडसर की महिलाएं बिचौलियों के जरिए कम कीमत पर लाख बेचने को मजबूर थीं। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर के निर्देश पर मैनपुर ब्लॉक के FPO ने महिलाओं के लिए सीधे बाजार और फैक्ट्री स्तर पर मार्केट लिंकेज स्थापित किया। अब एफपीओ द्वारा गांव से सीधे फैक्ट्री तक लाख उत्पादों का विपणन हो रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और महिलाओं को बेहतर दाम मिल रहे हैं।

प्रशिक्षण के बाद शुरू की खेती, सीईओ कर रहे मॉनिटरिंग
लाख की खेती शुरू करने से पहले महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। लाख से चूड़ी, आभूषण समेत कई उत्पाद बनाए जाते हैं। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर स्वयं समय-समय पर इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

“पंचायत को मिली नई पहचान”: सरपंच
ग्राम पंचायत डुमाघाट के सरपंच यशवंत मरकाम ने बताया, “महिला समूह द्वारा लाख उत्पादन से बेहतर लाभ मिल रहा है। अब पूरे जिले में हमारे पंचायत को लाख उत्पादन क्षेत्र के रूप में पहचान मिल गई है।”

इनकी रही अहम भूमिका
इस सफल पहल में जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर, पतंजलि मिश्रा, रमेश वर्मा, संगीता ध्रुव, युवराज नागेश तथा निधि साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह पहल ग्रामीण महिलाओं की आय वृद्धि, आत्मनिर्भरता और वन आधारित आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बनी है।