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होर्मुज स्‍ट्रेट से हटेगा अमेरिका, लेबनान पर हमला नहीं करेगा इजरायल, ईरान-USA पीस डील की 10 अहम बातें

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ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. खासकर होर्मुज स्‍ट्रेट के बंद होने से एशिया से लेकर यूरोप तक में खलबली मची हुई थी. इसके चलते LPG से लेकर पेट्रोल और डीजल तक की कीमतों में उछाल आया. भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है. अब अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील पर सहमति बनने के बाद होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्‍य होने की उम्‍मीद बढ़ गई है.
Iran-America Peace डील – ईरान जंग की वजह से पश्चिम एशिया में गंभीर तनाव की स्थिति पैदा हो गई. इसका सबसे बुरा असर एनर्जी कॉरिडोर के नाम से विख्‍यात होर्मुज स्‍ट्रेट से गैस और तेल लदे जहाजों की आवाजाही पर पड़ा है. इससे भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में LPG के साथ ही पेट्रोल और डीजल की कमी महसूस की जाने लगी. कुछ देशों में तो आपात स्थिति तक घोषित करनी पड़ गई. अब उसी होर्मुज स्‍ट्रेट को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बन गई है. शुक्रवार को जेनेवा में दोनों पक्षों की ओर से इस पीस डील पर औपचारिक हस्‍ताक्षर किया जाएगा. इसके साथ ही होर्मुज स्‍ट्रेट के खुलने का रास्‍ता भी साफ हो जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के तहत इजरायल को लेबनान में मिलिट्री ऑपरेशन रोकना होगा.
अमेरिका-ईरान पीस डील की 10 प्रमुख बातें इस तरह हैं -:
  1. अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर सहमति बन गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है. समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे. पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने समझौते की घोषणा की.
  2. समझौते के तहत युद्धविराम लागू किया जाएगा और दोनों पक्ष सैन्य अभियानों को रोकेंगे. पाकिस्तान के अनुसार, यह समझौता सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों की तत्काल और स्थायी समाप्ति का प्रावधान करता है. इसमें लेबनान से जुड़े संघर्ष को भी शामिल किया गया है, जो बातचीत का सबसे कठिन मुद्दा माना जा रहा था.
  3. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह तैयार है. उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि शुक्रवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा. साथ ही अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अपने अवरोधों को भी समाप्त करेगा.
  4. होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. यह मार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. पिछले कई महीनों से ईरान द्वारा इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद रखने के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई थी.
  5. समझौते की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.6 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है.
  6. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने बताया कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान एक व्यापक समझौते पर बातचीत होगी. इसमें प्रतिबंधों में राहत, आर्थिक सहयोग और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा शामिल होगी. अंतिम समाधान तक अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी.
  7. पीस डील के मसौदे के अनुसार, अमेरिका ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने पर सहमत हो सकता है. बदले में ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का विस्तार न करने का आश्वासन देगा. हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं.
  8. इस घोषणा के बावजूद क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. रविवार को लेबनान में इजरायली हमले ने शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए. ईरान ने हमले के लिए अमेरिका को भी जिम्मेदार ठहराया और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी, जबकि ट्रंप ने भी इस हमले को अनुचित बताया.
  9. इजरायल इस प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते का औपचारिक पक्षकार नहीं है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप के बीच लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद सामने आए हैं. इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार कार्रवाई जारी रखने की स्वतंत्रता बनाए रखेगा
  10. अमेरिका और ईरान दोनों देशों में इस समझौते को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण ट्रंप सरकार पर दबाव था, जबकि ईरान में कट्टरपंथी गुट इस समझौते का विरोध कर रहे हैं. कई शहरों में प्रदर्शन हुए और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के खिलाफ नारेबाजी भी