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TET अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट से झटका – रिजल्ट के बाद कैटेगरी बदलने की मांग वाली याचिकाएं खारिज

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बिलासपुर – छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने TET शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में आनलाइन आवेदन के दौरान ओबीसी नान-क्रीमी लेयर की जगह ओबीसी क्रीमी लेयर का विकल्प चुनने वाले 6 अभ्यर्थियों को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच ने दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद आवेदन पत्र में दर्ज जाति वर्ग में बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती। व्यापमं व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा त्रुटि सुधार का अवसर दिए जाने के बावजूद निर्धारित अवधि में सुधार नहीं करने वाले अभ्यर्थी बाद में राहत पाने के हकदार नहीं हैं।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक शाला गोंदपारा मोपका में पदस्थ सहायक शिक्षिका सरिता साहू, बेमेतरा जिले के साजा निवासी स्वाति वर्मा, महासमुंद जिले के ग्राम रेमड़ा निवासी सुनीता नायक, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के बिटल निवासी देवेंद्र कुमार डामगरे, महासमुंद जिले के सरायपाली निवासी सुप्रिया प्रुष्टी तथा धमतरी जिले के बंगलापारा निवासी हरीश कुमार ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर की थी। दायर याचिका में बताया, ऑनलाइन फार्म भरते समय अनजाने में उन्होंने ओबीसी नान-क्रीमी लेयर के स्थान पर ओबीसी क्रीमी लेयर का चयन कर लिया था।

परिणाम घोषित होने के बाद उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका, जिसके चलते उन्होंने व्यापमं के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर कैटेगरी सुधार और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की। राहत नहीं मिलने पर सभी ने हाई कोर्ट का रुख किया। व्यापमं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अविनाश सिंह ने कोर्ट को बताया, आवेदन की अंतिम तिथि 8 दिसंबर 2025 थी तथा 9 से 11 दिसंबर 2025 तक त्रुटि सुधार की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित अवधि में सुधार नहीं कराया और परिणाम जारी होने के महीनों बाद आवेदन प्रस्तुत कर जरुरी संशोधन की मांग की थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, आवेदन पत्र सही भरने की जिम्मेदारी पूरी तरह अभ्यर्थी की है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कैटेगरी बदलने की अनुमति देने से चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित होगी। कोर्ट ने पूर्व के आदेशों का हवाला देते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।