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रायपुर में 5 राइस मिलर्स पर बड़ी कार्रवाई, 11.50 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त

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रायपुर – राजधानी रायपुर में कस्टम मिलिंग के तहत चावल जमा नहीं करने वाले राइस मिलर्स पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) ने जिले के पांच राइस मिलर्स की करीब 11.50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त कर ली है। इस कार्रवाई के बाद राइस मिलर सेक्टर में हड़कंप मच गया है।

यह मामला उन मिलर्स से जुड़ा है जिन्होंने सरकारी अनुबंध के तहत धान उठाने के बाद तय समय सीमा में कस्टम मिलिंग का चावल जमा नहीं किया। बार-बार नोटिस और समय देने के बावजूद चावल जमा न करने पर मार्कफेड ने यह सख्त कदम उठाया है।  बैंक गारंटी जब्त करने के आदेश के बाद संबंधित बैंकों ने मिलर्स की सुरक्षा राशि को सीधे सरकारी खाते में ट्रांसफर कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों और अनुबंध की शर्तों के तहत की गई है।

तय समय सीमा में नहीं हुआ चावल जमा

सरकारी अनुबंध के अनुसार सभी राइस मिलर्स को 30 अप्रैल तक उपार्जन केंद्रों से उठाए गए धान के बदले कस्टम मिलिंग का चावल जमा करना अनिवार्य था। लेकिन कई मिलर्स ने तय समय सीमा के बावजूद चावल जमा नहीं किया। मार्कफेड की ओर से कई बार नोटिस जारी कर समय भी बढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी कारण विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए बैंक गारंटी जब्त करने का फैसला लिया।

32 मिलर्स अब भी जांच के घेरे में

जानकारी के अनुसार जिले में अभी भी करीब 32 राइस मिलर्स ऐसे हैं जिन्होंने पूरी तरह चावल जमा नहीं किया है। इन पर खाद्य विभाग और मार्कफेड की निगरानी जारी है। प्रशासन का कहना है कि यदि बाकी मिलर्स भी तय समय में चावल जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सार्वजनिक वितरण व्यवस्था पर असर

कस्टम मिलिंग के तहत तैयार चावल सीधे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन दुकानों में भेजा जाता है। लेकिन मिलर्स द्वारा समय पर चावल जमा न करने के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में स्टॉक की कमी की स्थिति बन रही है, जिससे कई इलाकों में राशन वितरण समय पर नहीं हो पा रहा है।

मिलर एसोसिएशन ने जताया विरोध

इस कार्रवाई के बाद राइस मिलर एसोसिएशन ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि कई मामलों में तकनीकी और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के कारण समय पर चावल जमा नहीं हो पाया। हालांकि प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि अनुबंध की शर्तें सभी मिलर्स के लिए समान हैं और समय सीमा का पालन करना अनिवार्य है।

मार्कफेड ने संकेत दिए हैं कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है तो आने वाले दिनों में अन्य मिलर्स पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग अब पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है और सभी डिफॉल्टर मिलर्स की सूची तैयार की जा रही है। इस कार्रवाई को सरकार की सप्लाई सिस्टम को मजबूत करने और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।