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राफेल सौदा रद्द मतलब संकट को न्योता, F-35, SU-55 या AMCA कौन बनेगा संकटमोचक?

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भारत फ्रांस से 114 राफेल सौदे में आईसीडीएस की मांग पर अड़ा हुआ है. फ्रांस रूस को जानकारी लीक होने की आशंका से इस तकनीक को देने से हिचक रहा है. ऐसे में इस डील में देरी हो रही है. अगर यह डील रद्द होती है तो भारत के लिए मुश्किल पैदा हो जाएगी. दूसरी तरफ बिना आईसीडीएस के राफेल जेट भारत के लिए बहुत काम के नहीं रह जाएंगे. इस तकनीकी के बिना भारत इस जेट में ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलें नहीं लगा सकेगा. भारत के हर एक बदलाव के लिए फ्रांस से अनुमति लेनी होगी. ऐसे में भारत चाहता है कि उसे राफेल को ऑपरेट करने में पूरी स्वतंत्रता हो.
फ्रांस के साथ 114 राफेल विमानों की खरीद सौदे पर ग्रहण लगने की आशंका जताई जा रही है. इंडियन एयरफोर्स की एयर स्ट्राइक क्षमता के लिए यह सौदा बेहद अहम है. इस वक्त एयरफोर्स के पास फाइटर जेट्स की भारी कमी है. उसकी स्क्वाड्रन क्षमता घटकर 29 पर आ गई है. जबकि मंजूर क्षमता 42 स्क्वाड्रन की है. लेकिन, रिपोर्ट आ रही है कि करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के राफेल सौदे में एक शर्त को लेकर खटास पैदा हो रही है. अपनी इस डिमांड पर भारत के अडिग रहने के कारण यह सौदा उस गति से नहीं बढ़ रहा जिस रफ्तार से इसे बढ़ना चाहिए.
क्या है भारत की डिमांड
दरअसल, भारत चाहता है कि फ्रांस राफेल फाइटर जेट का सोर्स कोड भले न दे लेकिन वह उसे इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट्स यानी आईसीडीएस उपलब्ध करवाए. इससे भारत इन फाइटर जेट्स में ब्रह्मोस जैसे देसी घातक मिसाइलें इंटीग्रेट कर सकेगा. वरना कोड के अभाव में राफेल में फ्रांस निर्मित हथियार ही लगाए जा सकेंगे जो बेहद महंगे होते हैं. भारत का कहना है कि वह जब इन जेट्स से इतनी भारी कीमत चुका रहा है तो उसे इसके ऑपरेशन में पूरी स्वतंत्रता चाहिए. और आईसीडीएस के बिना यह स्वतंत्रता संभव नहीं है. दूसरी तरफ फ्रांस का तर्क है कि अगर वह भारत को इन जेट्स को सोर्स कोड या फिर आईसीडीएस उपलब्ध कराता है तो यह संभव है कि यह जानकारी रूस तक पहुंच जाए. क्योंकि रूस भारत का एक करीबी दोस्त है और साथ ही ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें रूस के साथ मिलकर ही डेवलप की गई है. दूसरी तरफ रूस और फ्रांस के संबंध प्रतिद्वंद्वी के हैं. इस कारण पूरा मामला उलझता हुआ दिख रहा है. भारत की कोशिश है कि वह फ्रांस को इस बात का भरोसा दिलाए कि वह आईसीडीएस को किसी भी कीमत पर रूस के साथ साझा नहीं करेगा.
भारत को राफेल ही क्यों चाहिए?
अब आते हैं मूल सवाल पर कि अगर राफेल सौदा रद्द हो जाता है तो क्या होगा. दरअसल, अगर ऐसा होता है तो यह बहुत बुरी स्थिति होगी. भारत को इस वक्त फाइटर जेट्स की