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माओवाद को बड़ा झटका, 5 लाख की इनामी महिला नक्सली लक्ष्मी ने किया सरेंडर

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जगदलपुर में 5 लाख रुपए की इनामी महिला नक्सली लक्ष्मी ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण कर दिया।

जगदलपुर – छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। जगदलपुर में 5 लाख रुपए की इनामी महिला नक्सली लक्ष्मी ने पुलिस और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। लक्ष्मी छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश-तेलंगाना बॉर्डर क्षेत्र में सक्रिय थी और लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल बताई जा रही थी।

पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर लिया फैसला

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति और लगातार चलाए जा रहे आत्मसमर्पण अभियान से प्रभावित होकर लक्ष्मी ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण के दौरान अधिकारियों ने उसे पुनर्वास सहायता राशि भी प्रदान की।

सीमा क्षेत्र में थी सक्रिय

जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मी छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर सक्रिय नक्सली संगठन का हिस्सा थी। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। उस पर राज्य सरकार ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। लक्ष्मी के आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

क्या है छत्तीसगढ़ की नई पुनर्वास नीति?

मार्च 2025 में लागू की गई छत्तीसगढ़ सरकार की नई पुनर्वास नीति का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और नक्सल हिंसा प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, आवास सुविधा, बच्चों की शिक्षा, रोजगार के अवसर और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का मानना है कि इस पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

बस्तर संभाग में नक्सल मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां लंबे समय से सक्रिय रही महिला माओवादी उर्मिला उर्फ टेटकी (28) ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। रावघाट एरिया कमेटी की सदस्य रही उर्मिला ने मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला मुख्यालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। गुरुवार को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में उसका विधिवत आत्मसमर्पण कराया जाएगा।

13 साल तक नक्सली संगठन में रही सक्रिय

उर्मिला मूल रूप से मानपुर ब्लॉक के मुंजाल गांव की रहने वाली है। उसने करीब 13 वर्षों तक सशस्त्र माओवादी संगठन के साथ रहकर काम किया। कम उम्र में ही वह नक्सल गतिविधियों में शामिल हो गई थी और धीरे-धीरे संगठन के भीतर उसकी भूमिका मजबूत होती गई। उसका आत्मसमर्पण इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उसे मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का आखिरी सक्रिय माओवादी कैडर बताया जा रहा है।