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मजदूर दिवस पर भूपेश बघेल ने खाया बोरे – बासी तो बीजेपी के पेट में हुआ दर्द, पूछा आठ करोड़ का हिसाब

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रायपुर – छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 1 मई को मजदूर दिवस मनाया। इस अवसर पर प्रदेशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नागरिकों से बोरे-बासी खाने की अपील की है। अध्यक्ष दीपक बैज का तर्क है कि बोरे-बासी केवल भोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और किसानों-मजदूरों के पसीने का सम्मान है।

मोदी सरकार पर तीखा हमला

दीपक बैज ने इस सांस्कृतिक मुद्दे को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए आरोप लगाया है। उन्होंने कहा की केंद्र सरकार ने विपक्ष की अनुपस्थिति में दर्जनों श्रम कानूनों को बदलकर मजदूरों के अधिकारों का हनन किया है। काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 घंटे करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। इतना ही नहीं नए कानूनों के तहत न्यूनतम वेतन, बोनस और स्वास्थ्य बीमा जैसी अनिवार्य सुविधाओं को खत्म करने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार केवल अपने पूंजीपति मित्रों के फायदे के लिए काम कर रही है और छत्तीसगढ़ की संस्कृति का विरोध करती रही है।

बोरे-बासी के नाम पर 8 करोड़ का घोटाला : मंत्री कश्यप

कांग्रेस के इस सांस्कृतिक कार्ड पर कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने पलटवार करते हुए कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल की याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के लिए परंपराएं केवल ‘लूट का जरिया’ रही हैं।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

मंत्री कश्यप ने जनता को 8 करोड़ का घोटाला याद दिलाया। पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान मजदूर दिवस पर बोरे-बासी खाने के आयोजन के नाम पर लगभग 8 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस नेता विलायती जीवनशैली जीते हैं और केवल चुनावी लाभ के लिए बोरे-बासी खाने का ढोंग करते हैं। केदार कश्यप ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ की परंपराओं को सहेजने का असली काम डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकारों ने किया है, जबकि कांग्रेस ने केवल जन-धन की लूट की।

सियासी समीकरण

छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘बोरे-बासी’ अब महज एक ग्रामीण व्यंजन नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्रीय गौरव का एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है। बोरे-बासी पर शुरू हुआ यह दंगल थमता नजर नहीं आ रहा। एक तरफ कांग्रेस इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत बताकर सड़कों पर उतरने की तैयारी में है, वहीं भाजपा ने ‘भ्रष्टाचार’ का मुद्दा उछालकर कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। अब देखना यह है कि जनता इस ‘सियासी बासी’ का स्वाद किस तरह लेती है।