महासमुंद में कक्षा 4 के प्रश्नपत्र में भगवान राम पर आपत्तिजनक सवाल पूछे जाने के मामले के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे को सस्पेंड कर दिया गया है. धार्मिक भावनाएं आहत होने के साथ-साथ वित्तीय गड़बड़ी और लापरवाही को भी कार्रवाई का कारण बताया गया है. उनकी जगह पर बीएल देवांगन को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
महासमुंद – जिले में कक्षा 4 की परीक्षा के प्रश्नपत्र में भगवान राम को लेकर आपत्तिजनक प्रश्न पूछे जाने का मामला सामने आने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस घटना ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है. इस मामले के सामने आते ही स्कूल शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की. जांच में पाया गया कि प्रश्नपत्र में ऐसी सामग्री शामिल की गई थी, जो धार्मिक भावनाओं के खिलाफ मानी जा रही थी. इसके साथ ही विभाग ने यह भी पाया कि परीक्षा और प्रशासनिक कार्यों में गंभीर लापरवाही बरती गई थी.
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स पूरे मामले में महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे को जिम्मेदार माना गया. विभाग ने कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी उनके निलंबन के प्रमुख कारण बताए गए हैं.
स पूरे मामले में महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे को जिम्मेदार माना गया. विभाग ने कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी उनके निलंबन के प्रमुख कारण बताए गए हैं.महासमुंद जिले में कक्षा 4 की परीक्षा के प्रश्नपत्र में भगवान राम को लेकर आपत्तिजनक प्रश्न पूछे जाने का मामला सामने आने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस घटना ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है. इस मामले के सामने आते ही स्कूल शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की. जांच में पाया गया कि प्रश्नपत्र में ऐसी सामग्री शामिल की गई थी, जो धार्मिक भावनाओं के खिलाफ मानी जा रही थी. इसके साथ ही विभाग ने यह भी पाया कि परीक्षा और प्रशासनिक कार्यों में गंभीर लापरवाही बरती गई थी.
इस पूरे मामले में महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे को जिम्मेदार माना गया. विभाग ने कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप भी उनके निलंबन के प्रमुख कारण बताए गए हैं.






