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‘पापा पावर’ का इस्तेमाल.. ‘शैडो सीएम’ बनकर दिखाई रंगबाजी! जानिए अमित जोगी ने क्यों और कैसे करवाई थी रामावतार जग्गी की हत्या? यहां जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

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रायपुर  –  छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार सिंह जग्गी हत्याकांड में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार बड़ा फैसला सामने आया है। 4 जून 2003 को रायपुर के मौदहापारा इलाके में दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के पहले सीएम अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला पिछले करीब 23 वर्षों से न्यायालय में लंबित था और राज्य की राजनीति पर लगातार असर डालता रहा। अदालत के इस फैसले को छत्तीसगढ़ की राजनीति के एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

मौदहापारा में दिनदहाड़े हुई थी हत्या

दरअसल, 4 जून 2003 को सुबह करीब 11:55 बजे रायपुर के व्यस्त मौदहापारा क्षेत्र में अज्ञात हमलावरों ने कारोबारी रामावतार सिंह जग्गी पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। इस हमले में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद हमलावर फरार हो गए और पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे लूट से जुड़ा मामला बताया, लेकिन जल्द ही यह केस राजनीतिक रंग लेता गया। जग्गी के परिवार और विपक्ष ने इसे सुनियोजित राजनीतिक हत्या करार देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी पर साजिश रचने का आरोप लगाया।

सीबीआई जांच और लंबी कानूनी लड़ाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। जांच में अमित जोगी का नाम सामने आया और चार्जशीट दाखिल की गई। हालांकि, 2007 में ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई। इस फैसले को चुनौती देते हुए जग्गी परिवार ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां यह मामला वर्षों तक विचाराधीन रहा।

हाईकमान का फैसला और रिश्तों में तल्खी

जग्गी हत्याकांड को 2003 के विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जाता रहा है। साल 2000 में जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ एक नया राज्य बना। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि पहला मुख्यमंत्री कौन होगा? दावेदार कई थे लेकिन सबसे मजबूत दावेदारी मानी जा रही थी विद्याचरण शुक्ल की। विद्याचरण शुक्ल के पिता रविशंकर शुक्ल मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे थे और खुद विद्या चरण शुक्ल इंदिरा गांधी सरकार में कई बार केंद्रीय मंत्री रह चुके थे। राज्य निर्माण के समय आखिरी समय में कांग्रेस आलाकमान ने एक अलग दांव खेला और अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया गया। IBC 24 से साभार