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एपस्टीन फाइल में खुला पाकिस्तान का काला राज,पोलियो की आड़ में खेल

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दुनियाभर में अय्याशी और यौन अपराधों के लिए कुख्यात अमेरिकी जेफ्री एपस्टीन की फाइलों ने पूरे दुनिया का पोल खोल कर रख दिया है. मौत के बाद भी उसके काले कारनामों लोगों को चौंका रही हैं. अब एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. लगातार आतंकवाद पर छाती पीटने वाले पाकिस्तान का पूरा पोल खुल गया है. ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने एपस्टीन की फाइलों से जुड़े कुछ ऐसे ईमेल का पर्दाफाश किया है. इसमें पाकिस्तान के कबायली इलाकों और वहां चल रहे खेल की बात की गई है. इन ईमेल्स में पाकिस्तान के पेशावर को ‘दुनिया की जिहाद राजधानी बताया गया है. सवाल यह है कि एक यौन अपराधी, जिसका पब्लिक हेल्थ या सरकार से कोई लेना-देना नहीं था, उसे पाकिस्तान के तालिबान, आईएसआई और पोलियो अभियानों की खुफिया जानकारी क्यों भेजी जा रही थी?
पाकिस्तान पर ये ताजा खुलासे 2013 और 2015 के ईमेल्स पर आधारित हैं. इन्हें एक फील्ड ऑपरेटिव नसरा हसन  ने भेजे थे. 30 अप्रैल 2013 के एक ईमेल में, नसरा ने पेशावर छोड़ने का जिक्र करते हुए उसे दुनिया की जिहाद राजधानी बताया. उसने लिखा कि शहर और उसके आसपास लगातार बमबारी और चुनाव पूर्व अशांति के कारण वह ज्यादा बात नहीं कर पाई. यह वह दौर था जब पाकिस्तान में आतंकी हिंसा अपने चरम पर थी. नसरा हसन ने दावा किया कि उसने  (संघ शासित कबायली क्षेत्र) की सभी सात एजेंसियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. ये इलाके लंबे समय तक तालिबान और अल-कायदा के गढ़ माने जाते रहे हैं. उसने खैबर-पख्तूनख्वा के स्वास्थ्य सचिव और FATA के स्वास्थ्य अधिकारियों से भी मीटिंग की.
पाकी नाम और पोलियो का कवर?
नसरा ने अपने ईमेल में एक चौंकाने वाली बात लिखी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में हर होटल की लॉबी में सुरक्षा अधिकारी और खुफिया एजेंट बैठे रहते हैं. लेकिन, उसने दावा किया कि उसका ‘पाकी नाम और पोलियो का विषय’  होने की वजह से उन्हें खास दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा. यानी, क्या पोलियो अभियान का इस्तेमाल सिर्फ एक ‘कवर’ के तौर पर किया जा रहा था?
तालिबानी कमांडर से बात की
नसरा के मैसेज से सबसे बड़ा बम तब फूटा जब उसने लिखा कि एक ‘फिक्सर’ के जरिए उसने तालिबान के एक सीनियर कमांडर से फोन पर बात की. ताकि पोलियो पर उनका रुख जाना जा सके. यह सारी जानकारी एक इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के जरिए सीधे जेफ्री एपस्टीन तक पहुंच रही थी. आखिर एपस्टीन को तालिबान के रुख से क्या मतलब था?
फंडिंग का खेल और बिल का जिक्र
ईमेल्स में पैसों की बातचीत भी सामने आई है. नसरा ने रिपोर्ट दी कि FATA प्रशासन यूएई सरकार के साथ एक समझौता साइन करने वाला है. इससे अगले 3 साल तक पोलियो वैक्सीनेशन का पूरा खर्च कवर हो जाएगा. इसी चेन में, बोरिस निकोलिक नाम के शख्स का एक नोट भी है, जिसमें लिखा था, ‘वैसे बिल (Bill) ने पोलियो के लिए सारा पैसा जुटा लिया है. जरूरत से भी ज्यादा. क्या तुम अपने मैकेनिज्म (तंत्र) के साथ इसकी कल्पना कर सकते हो?’ माना जा रहा है कि यहां ‘बिल’ का इशारा बिल गेट्स की तरफ हो सकता है, जो पोलियो उन्मूलन के लिए बड़ी फंडिंग करते हैं, हालांकि ईमेल्स में इसकी पुष्टि नहीं है. नसरा ने अपनी रिपोर्ट में यह भी साफ किया कि पोलियो वैक्सीन का विरोध धार्मिक कारणों से बहुत कम है, असली वजह पैसा, नौकरियां और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ है. यह रिपोर्ट एपस्टीन को भेजी गई थी, जो यह दिखाता है कि उसे वहां की जमीनी हकीकत की बारीक समझ दी जा रही थी.
तालिबान और ISI की खुली पोल
10 अगस्त 2015 का एक और ईमेल तो सीधे तौर पर किसी खुफिया रिपोर्ट जैसा लगता है. इसमें पब्लिक हेल्थ की जगह हाई-लेवल मिलिटेंट पॉलिटिक्स पर बात की गई थी. इसमें तालिबान संस्थापक मुल्ला उमर की मौत के बाद के हालात का विश्लेषण था. ईमेल में बताया गया कि मुल्ला अख्तर मंसूर नेतृत्व की रेस में आगे है. इसमें मौलाना समीउल हक (जिसे तालिबान का पितामह कहा जाता है) को ‘प्रो-PEP’ (पोलियो उन्मूलन समर्थक) बताया गया. इस ईमेल में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका पर भी बात की गई है. लिखा गया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल प्रक्रिया को कंट्रोल कर रहे हैं और अपनी सारी मुर्गियों को एक दरबे में लाने (यानी सबको एक साथ लाने) की कोशिश में हैं. साथ ही, अमेरिका की नाराजगी का भी जिक्र था कि ISI दोहा प्रक्रिया का समर्थन क्यों नहीं कर रही.