रायगढ़ – जिले में एनटीपीसी तिलाईपाली परियोजना से प्रभावित आठ ग्रामों के ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। यदि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।
जिलाधीश को सौंपे गए ज्ञापन में तिलाईपाली, कुधुरमौहा, नयारामपुर, चोटीगुडा, साल्हेपाली, अजीतगढ़ और रायकेरा के ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अन्य 10 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे 25 जनवरी से धरने पर बैठे हैं, लेकिन एनटीपीसी से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो वे एनटीपीसी कोयला खनन और संबंधित खदानों के समस्त कार्यों का विरोध करेंगे। अपर कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच कर तत्काल निराकरण का प्रयास किया जाएगा और इसके लिए एक टीम गठित की जाएगी।
क्या है 10 सूत्रीय मांगों में
1. संविधान के पांचवी अनुसूची क्षेत्र में जो कि हमारा गांव आता है, जिसमें भूमि अधिग्रहण के तहत ग्राम सभा से सहमति लेना अति आवश्यक होता है, लेकिन एनटीपीसी एवं भारत सरकार द्वारा 27 नवंबर 2009 के अधिसूचना के अनुसार, किसानों को बिना सूचना दिये अवैध तरीके से अधिग्रहण कर लिया गया। जो पांचवीं अनुसुची के नियमावली का उल्लंघन है। जिसे निरस्त कर पुनः नये आवंटन दिनांक 8 सितंबर 2015 से अधिग्रहण मान कर मुआवजा किसानों को प्रदाय किया जाये।
2. पांचवीं अनुसुची क्षेत्र में ग्राम सभा सर्वोपरी होता है। जिसमें संविधान के अनुच्छेद 243(क) शक्तियों कर प्रयोग करते हुए हम 10 फरवरी को महाग्रामसभा का आयोजन कर उसमें मुख्य चार विषयों पर प्रस्ताव पास किए। जिसका नियम अनुसार कार्रवाई कर अधिग्रहण निरस्त किया जाये।
3. भूमि अधिग्रहण में कोल वेरिंग एक्ट 1957 के अनुसार, धारा 13-5 का उल्लंघन कर मुआवजा निर्धारण किया गया। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। साथ ही नये अधिनियम 2013 का अनुसरण में किसानों को भूमि का मुआवजा दिया जाये।
4. पेशा कानून का पालन किया जाये, जो हमारे क्षेत्र में लागू होता है। जिससे आदिवासियों का जल जंगल जमीन तथा खनिजों में आदिवासियों का पूर्वज से संपूर्ण अधिकार होता है। जिसे उनके हक अधिकार को समझते हुए किसानों को उनके हक अधिकार दिलाने की कृपा करें।
5. एनटीपीसी द्वारा हमारे क्षेत्र में बहुत से गांव में बिना मकान के मुआवजा दिया गया है। जिस पर उचित कार्रवाई की जाए। यदि कार्रवाई नहीं हो सकती है तो बाकी बचे किसानों को उसी प्रकार से बिना घर के मुआवजा दिया जाये।
6. तेंदुपत्ता कार्डधारियों के प्रति कार्ड पांच लाख राशि मुआवजा देने के लिये शासन प्रशासन और एनटीपीसी द्वारा आश्वासन दिया गया था। जिसे अभी तक किसी भी कार्डधारी को नहीं दिया गया है। जिसे प्रदान किया जाये।
7. पूर्व में एनटीपीसी द्वारा किसानों से बिना जानकारी के सहमति एवं बहला-फुसलाकर तथा ठगी कर परामर्श सहमति के नाम पर प्रत्येक गांव में जनसंख्या निवारण केन्द्र खोला गया था। उसमें रजिस्टर में हस्ताक्षर कराए गए हैं। उसे ही एनटीपीसी के अन्य दस्तावेजों में संलग्न किया गया है।
8. पुर्नवास योजना के नये अधिनियम के तहत नये कटआफ डेट जो कि नये आवंटन 8 अगस्त 2015 को मानकर संशोधन किया जाये।
9. पूर्वज से किसानों द्वारा काबिज कर उसे कृषि कार्य कर जीवन यापन करते आ रहे तथा छत्तीसगढ़ शासन को लगान करते आ रहे थे। यदि उस किसानों के गान कर रसीद एवं अन्य दस्तावेज रहे हैं तो उसे वन अधिकार पट्टा के सामान मानकर मुआवजा प्रदान किया जाये।
10. प्रभावित किसानों के परिवारजनों को एनटीपीसी एवं एनटीपीसी से संबंधित ठेका कंपनी में रोजगार प्रदान किया जाए। बाहरी व्यक्ति को ठेका कंपनी एवं एनटीपीसी द्वारा अवैध तरीके से कार्य में रखा गया है। उन्हें तत्काल कार्य से मुक्त किया जाए। उनके ऊपर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि एनटीपीसी द्वारा रोजगार नहीं दे पाने की स्थिति में उस परिवार के प्रत्येक 2025 में 18 वर्ष पूर्ण किए व्यक्तियों को कम से कम आर्थिक सहायता राशि एनटीपीसी संबंधित ठेका कंपनी द्वारा 15 लाख रुपये दिए जाएं।






