बिलासपुर – शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर चल रहे कथित खेल ने प्रशासनिक ईमानदारी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने पूरे मामले को संगठित भ्रष्टाचार बताते हुए कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जांच ज्वाइंट डायरेक्टर शिक्षा या कमिश्नर स्तर पर नहीं कराई गई, तो मामला डीपीआई और सचिव स्तर तक ले जाया जाएगा। आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन और धरना भी किया जाएगा।
अंकित गौराहा के अनुसार यह प्रकरण किसी एक बाबू तक सीमित नहीं है, बल्कि तत्कालीन और वर्तमान पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इसके बावजूद जिला प्रशासन के आदेश पर उसी कार्यालय के अधीन खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच सौंपना शुरू से ही निष्पक्षता को कमजोर करता है।
शिकायत में दर्ज तथ्यों के अनुसार शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को दरकिनार कर एक ही परिवार में दो-दो नियुक्तियां दी गईं। मृत कर्मचारी की पहली पत्नी की संतान यश साहू को पहले अनुकंपा नियुक्ति दी गई, जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि एक परिवार से केवल एक ही अनुकंपा नियुक्ति वैध है। इसके बावजूद बाद में दूसरी पत्नी के पुत्र को भी अनुकंपा पर नियुक्त कर दिया गया। यह सब विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज होने के बावजूद नजरअंदाज किया गया।
अंकित गौराहा का आरोप है कि इन नियुक्तियों के पीछे स्थापना शाखा में प्रभाव रखने वाले ‘विभाग का बाबू’ की अहम भूमिका रही। शिकायत में कहा गया है कि कथित लेन-देन के बाद नियमों को तोड़-मरोड़ कर नियुक्तियां कराई गईं। उस समय और वर्तमान में भी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे विभागीय निर्णय प्रक्रिया के शीर्ष पर रहे, इसके बावजूद न तो नियमों का पालन कराया गया और न ही किसी स्तर पर आपत्ति दर्ज की गई।
प्रेस नोट में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 2021 और 2022 में नियमों के विरुद्ध पदोन्नतियां की गईं। सहायक ग्रेड-03 से सहायक ग्रेड-02 के पद पर कर्मचारियों को पदोन्नत कर दिया गया, जबकि उनकी पात्रता और पद स्वीकृति स्पष्ट नहीं थी। इसके बावजूद वर्षों तक वेतन आहरण कराया गया और आज तक उन पदोन्नतियों को निरस्त नहीं किया गया।






