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मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान क्यों इतना जरूरी? जानें तिल और गुड़ बांटने का भी सीक्रेट

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शास्त्रों के हिसाब से सूर्य शनि के पिता माने जाते हैं. पिता का बेटे के घर जाना शुभ संकेत है. इसी वजह से इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है. इसी दिन गंगा जी पृथ्वी पर आई थीं और कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिली थीं. मकर संक्रांति सिर्फ त्योहार नहीं आस्था, मौसम और परंपरा का संगम है. इस दिन खिचड़ी दान करने से पुण्य और सुख समृद्धि बढ़ती है. लेकिन खिचड़ी का दान ही क्यों किया जाता है. लोकल 18 ने इस बारे में पंडित उमा चंद्र मिश्रा से बात की.
रायपुर – माघ का महीना वैसे भी अपने आप में खास है. चाहे बात मौसम की हो या धर्म की. इसी महीने मकर संक्रांति आती है और हर जगह लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाते हैं. हिंदू परंपरा में इस दिन खिचड़ी दान करने का बड़ा महत्त्व है. लोग मानते हैं कि इस दिन दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पुण्य भी मिलता है. ग्रंथों में लिखा है कि अगर आप अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा से खिचड़ी दान करते हैं तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है. सवाल है कि कि क्या सिर्फ संक्रांति के दिन ही दान करना जरूरी है. पंडितों की मानें तो माघ के महीने में कभी भी खिचड़ी दान करो, उसका अच्छा फल जरूर मिलेगा.
पिता बेटे के घर
बातचीत में  पंडित प अरविन्द मिश्रा बताते हैं कि मकर संक्रांति वो समय है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं. शास्त्रों के हिसाब से सूर्य शनि के पिता माने जाते हैं. पिता का बेटे के घर जाना शुभ संकेत है और इसी वजह से इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है. इस दिन तिल, गुड़, अनाज और खास तौर पर खिचड़ी का दान करने की परंपरा है. पंडित मिश्रा कहते हैं कि इस दिन दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और यह परंपरा बहुत पुरानी है.