नहीं मानेंगे कोई भी शर्त: गृहमंत्री विजय शर्मा
दूसरी ओर इस मामले में प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि पत्र की सत्यता की जांच करानी होगी। नक्सलवाद के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा। यदि नक्सली बंदूक त्यागकर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरेंडर नक्सलियों के लिए राज्य में नियदनेल्लानार, पुनर्वास समेत कई सारी योजना चला रही है। ऐसे में नक्सली बंदूक छोड़कर सामने आएंगे, तो सरकार उनके साथ शांतिवार्ता के लिये पहल करेगी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस मामले में अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि पत्र वास्तव में माओवादी नेतृत्व की ओर से आया है, तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि अगर पत्र की सत्यता सिद्ध होती है तो सरकार वार्ता की दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शांति की समर्थक है, लेकिन किसी भी प्रकार की रणनीति या छल से सावधानी बरतना जरूरी है।
जवानों के हौसले बुलंद: विकास उपाध्याय
वहीं पूर्व संसदीय सचिव और रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि नक्सल मोर्चे पर कांग्रेस के समय से अभियान में तेजी आई है। हमारे जवानों के हौसले बुलंद हैं। नक्सलवाद कमजोर हो रहा है, लेकिन निर्दोष आदिवासियों की मौत नहीं होनी चाहिए। कई बार आदिवासियों की हत्या के बाद उन्हें नक्सली बता दिया जाता है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
हथियार डालने की बात पर नापाक करतूत जारी, आखिर कैसे करें विश्वास?
एक तरफ नक्सली जहां हथियार छोड़कर सरकार से शांतिवार्ता की बात कह रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इसके विपरित निर्दोष ग्रामीणों को मौत की नींद सुला रहे हैं। मंगलवार की रात दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने एक ग्रामीण की हत्या कर दी। नक्सलियों ने ग्राम निलावाया में बण्डी कोर्राम के घर पहुंचकर उसे बाहर निकाला। फिर धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी। ग्रामीणों ने बताया कि चारवर्ष पहले भी नक्सलियों ने मृतक ग्रामीण के बेटे हरेंद्र कोर्राम की भी हत्या कर दी थी। वहीं बीजापुर जिले के जांगला थाना क्षेत्र के ग्राम बेंचरम में 16-17 सितम्बर की दरम्यानी रात को ग्रामीण दशरूराम ओयाम (उम्र 36 वर्ष) पर टंगिये से वार कर हत्या कर दी। दोनों ही नृशंस हत्या से ग्रामीणों में माआवोदियों के प्रति आक्रोश है।
सरकार से सीजफायर करने की रखी शर्त
इससे पूर्व 16 सितंबर 2025 को नक्सलियों ने पहली बार प्रेस नोट जारी कर कहा कि वो हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी रूप से छोड़कर शांति वार्ता को तैयार हैं। माआवोदियों ने सरकार से सीजफायर करने की अपील की है। सीपीआई (माओवादी) ने कहा कि देश के कई राज्यों में जेल में बंद साथियों से चर्चा करने के लिये सरकार अनुमति दें। वहीं पुलिस भी एक महीने के लिये ऑपरेशन रोकें।
पहली बार सरेंडर करने और हथियार डालने को राजी
माओवादियों के केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय का प्रेस नोट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें उसका कहना है कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। संगठन हथियारबंद संघर्ष को अस्थायी रूप से छोड़कर जनसमस्याओं के समाधान के लिए जन संघर्ष को आगे बढ़ाएगा। हथियार छोड़कर देश की राजनैतिक पार्टियों और संघर्षरत संस्थाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे। बदलते हालात और देश की परिस्थितियों को देखते हुए वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं पर इस प्रक्रिया में वो अपनी विचारधारा और राजनीतिक मान्यताओं से पीछे नहीं हटेंगे। मार्च 2025 में संगठन के जारी प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने इससे पहले भी संघर्ष विराम और शांति वार्ता की पेशकश की थी, लेकिन उस दौरान ठोस माहौल नहीं बनाया गया। सरकार और सुरक्षा बल यदि वास्तव में शांति चाहते हैं तो हमारे साथियों पर दमनात्मक कार्रवाई बंद कर विश्वसनीय वातावरण बनायें। हमारे शीर्ष नेतृत्व, कैडर और जेल में बंद सदस्यों को वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए। यदि उनकी शर्तों को माना गया और प्रतिनिधियों को शामिल किया गया तो वे हथियार छोड़कर वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
नक्सलियों के केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 2025 मार्च आखरी सप्ताह से हमारी पार्टी सरकार के साथ ‘शांति वार्ता’ के लिए गंभीर एवं ईमानदारी के साथ प्रयास कर रही है। हमारी पार्टी के केंद्रीय कमेटी का प्रवक्ता कामरेड अभय के नाम पर मई 10 को स्वयम हमारी पार्टी के महासचिव एक प्रेस बयान जारी किया था। उसमें उन्होंने हमारी पार्टी हथियार छोड़ने के बारे में उल्लेख करते हुए इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर हमारी पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्वकारी कामरेडों के साथ सलाह मशविरा करने के लिए एक माह के समय की मांग करते हुए सरकार के सामने सीज फायर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन दुर्भाग्यवश उस पर केंद्र सरकार अपनी सानुकूल रूख को जाहिर नहीं किया था, बल्कि जनवरी 2024 से जारी अपनी घेराव और उन्मुलन सैनिक हमलों को और तेज किए हैं।
पत्र आगे लिखा है कि हजारों की संख्या में सशस्त्र पुलिस बल तैनात कर घेराव एवं उन्मूलन हमले को अंजाम दिया गया। माड के गुंडेकोट के पास 21 मई को हुए भीषण हमले में साहसिक रूप से प्रतिरोध करते हुए हमारी पार्टी के महासचिव कामरेड बसवाराजू सहित केंद्रीय कमटी के स्टाफ एवं उनके सुरक्षा गार्ड के 28 साथी शहीद हुए। इस परिप्रेक्ष्य में उनसे पहले किए गए शांति वार्ता की प्रक्रिया को बीच में आधा अधूरा न छोड़कर उनके विचारों के अनुरूप शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए हमनें यह निर्णय लिया है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का संकल्प
हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘मिशन 2026’ से पहले ही एक बार फिर नक्सलियों से हथियार छोड़ने के लिए अपील की थी। ऐसा नहीं किये जाने पर फोर्स के मुंहतोड़ जवाब के लिये तैयार रहने की चेतावनी दी थी। शाह ने संकल्प लिया है कि मार्च 2026 से पहले छत्तीसगढ़ समेत देश को नक्सलमुक्त कर दिया जायेगा। वहीं राज्य सरकार के गृहमंत्री शर्मा ने भी कई बार नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की बात कही है।
कई बार लिख चुके हैं लेटर पर इस बार क्यों है खास?
बता दें कि नक्सली लीडर इससे पहले भी चार बार लेटर लिखकर शांति वार्ता की बात कर चुके हैं। इन सभी खतों में हथियार छोड़ने की बात नहीं की थी पर पहली बार नक्सलियों ने हथियार त्यागकर शांतिवार्ता की पेशकश किये हैं। इससे पूर्व लिखे पत्रों में सरकार पर ड्रोन के जरिये हमले करने, नक्सली के नाम पर निर्दोष ग्रामीणों को मारने और दमनकारी नीति अपनाने के आरोप लगाते रहे हैं। पहली बार इस खत में ऐसा कुछ नहीं लिखा है। इससे स्पष्ट है कि नक्सली संगठन कमजोर हो चुका है। लगातार शीर्ष नेताओं के मारे जाने, देश के कई जेलों बंद होने और सरेंडर करने से नक्सल नेटवर्क की पकड़ कमजोर होती जा रही है। वहीं बस्तर संभाग में ‘नक्सलियों की राजधानी’ कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर सुरक्षा बलों की ओर से कब्जा होने और यहां से खूंखार नक्सली हिड़मा समेत कई माओवादियों के भागकर दूसरे राज्यों में चले जाने से नक्सलियों की ताकत लगातार घटती जा रही है। ऐसे में वो शांतिवार्ता में ही भलाई समझ रहे हैं।
आखिर क्यों भयभीत हैं माओवादी?
छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त राज्य बनाने के लिये सुरक्षा बलों की ओर से लगातार नक्सल ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ताबड़तोड़ ऑपरेशन जारी है। इसका असर माओवादी संगठन पर देखने को मिल रहा है। सफल ऑपरेशनों से भयभीत होकर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। हाल ही में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी मेंबर सुजाता ने तेलंगाना में सरेंडर किया था।
पढ़ें, सीपीआई (माओवादी) संगठन के केंद्रीय प्रवक्ता ने क्या लिखा है प्रेस नोट में…
