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सिकासार जलाशय में गिरने वाले विशाल कुलाप जलप्रपात की खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर सम्मोहित कर रहा

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पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने लगाई पाबंदी, जलप्रपात पहाड़ी क्षेत्र के कण-कण में अनुपम सौंदर्य बिखरा पड़ा

गरियाबंद – बारिश प्रारंभ होते ही गरियाबंद जिले के पहाड़ी इलाके के जलप्रपातो की खूबसूरती निखर कर सामने आ रही है और लोगों को अभिभूत कर रही है।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के ओड़ आमामोरा सिकासार पहाड़ी क्षेत्र में प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य कण -कण में बिखरा पड़ा है यहां दूर -दूर तक फैली बड़े -बड़े उंची नीचे घाटिया घने जंगल तथा फुलो से ढके रास्ते व ठंडी मस्त हवा पर्यटकों का मन बरबस ही मोह लेती है।

खास बात यह है कि यहां पर लोगों का कोलाहल व भीड़भाड़ बहुत कम है यकीन जानिए यहां पहुंचने के बाद पर्यटक स्वयं को प्रकृति के निकट पाता है। वैसे तो गरियाबंद ज़िला पर्यटन के दृष्टिकोण से काफी प्रसिद्ध हैं यहां प्रकृति ने अपनी खूबसूरत छठा बिखेरा है | कल कल बहती जलप्रपात बरबस ही पर्यटकों का ध्यान अपनी और खींचती हैं।

तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 30 -35 किलोमीटर दुर बीहड जंगल और पहाडी के उपर से गिर रहे कुलाप जलप्रपात जंगलो और पहाडो के बीच अदभूत नजारा आज काफी विख्यात है,आमामोरा अमलोर से लगभग 06 किमी जंगली रास्ता से भी यहां पहुंचा जाता है।लेकिन यहा तक पहुचना हर किसी के बस की बात नहीं है। बहुत ही कम लोग यहा तक पहुच पाते है सबसे पहले तो यहा पहुचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। घने जंगलों पहाड़ों को पार करते हुए यहां पहुंचा जाता है और इस बियाबान जंगल में अनेक प्रकार के जंगली जीव जन्तुओं के साथ हाथी प्रभावित क्षेत्र भी है, जिसके कारण इस जलप्रपात में बहुत कम ही लोग पहुच पाते हैं।

खासकर बारिश के दिनों में इस जलप्रपात की सुन्दरता बेहद ही खूबसूरत और रोमांचक भरा है। काफी ऊचाई से कल कल की आवाज करते सिकासार जलाशय के उपर गिर रहे कुलाप जलप्रपात को देखने का एक अलग ही आंनंद है। घनघोर पहाड़ी के ऊपर यह जलप्रपात लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है इसकी सुन्दरता इन दिनों चार चांद लगा रही है लेकिन यहां जाने से पहले कई सावधानिया बेहद जरूरी है।

पहले वन विभाग के स्थानीय अधिकारी कर्मचारियो से संपर्क किया जाना चाहिए। क्योंकि यह क्षेत्र हाथी प्रभावित क्षेत्र के साथ हिंसक वन्यप्राणी क्षेत्र है यहां तेंदुआ, भालु, लकड़बघ्घा व अन्य वन्यप्राणी भारी संख्या में पाये जाते हैं और बारिश में जंगल घने होने के कारण कब हमला कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता इसलिए पहले इसके लिए वन विभाग से संपर्क किया जाना चाहिए साथ ही यहां वन विभाग द्वारा तैनात गाईड ले जाना बेहद जरूरी है। दूसरा रास्ता नाव के सहारे यहां सिकासार जलाशय को पार कर पहुंचा जा सकता है,