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महीने के आखिरी दिन भी शेयर मार्केट तबाह, निवेशकों के 6.64 लाख करोड़ रुपये स्वाहा

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मुंबई – भारतीय शेयर मार्केट में निवेशकों का हाल बुरा है। पिछले कई महीनों से शेयर मार्केट में सिर्फ लाल निशान दिखाई दे रहे हैं। अब तक निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। फरवरी के आखिरी दिन यानी 28 फरवरी को भी मार्केट की शुरुवात अच्छी नहीं रही। शुक्रवार को मार्केट खुलते ही निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए। सबसे अधिक घाटा ऑटो, आईटी सेक्टर में देखने को मिला, जिनके इंडेक्स 2-2 फिसदी से अधिक नीचे आ गए। वहीं सेंसेक्स की बात करे तो मामूली बढ़त में सिर्फ दो स्टॉक्स देखने को मिल रहे हैं। बात करें BSE की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 6.64 लाख करोड़ रुपये घट गया है।

एक शेयर ग्रीन

27 फरवरी को BSEपर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप 3,93,10,210.53 करोड़ रुपये था। वहीं, 28 फरवरी को मार्केट खुलने पर गिरकर 3,8646,106.34 करोड़ रुपये हो गए है। इसका मतलब निवशकों को कुल 6,64,104.19 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। वीहं, सेंसेक्स पर अभी सिर्फ रिलायंस का स्टॉक ग्रीन है। साथ ही उसमें तेजी भी देखने को ममिल रही है। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट और केवल दो में तेजी है। निफ्टी के 50 शेयरों में से 46 में गिरावट और केवल चार में तेजी है। NSE के सभी सेक्टोरल इंडेक्स में आज गिरावट है।सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी IT में 3.27%, ऑटो में 2.65%, मीडिया में 2.50%, सरकारी बैंकों में 2.05% और मेटल में 1.82% है। इसके अलावा, फार्मा, बैंकिंग, FMCG और फाइनेंशियल सर्विसेज में 1% तक की गिरावट है।

कौन है तुहिन कांता पांडेय?

तुहिन कांता पांडेय को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे माधबी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका सेबी प्रमुख के रूप में कार्यकाल 28 फरवरी 2025 को समाप्त हो रहा है। पांडेय का कार्यकाल तीन वर्षों के लिए होगा।तुहिन कांता पांडेय एक वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जो 1987 बैच के ओडिशा कैडर से हैं। वर्तमान में वे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में वित्त सचिव और राजस्व सचिव के पद पर कार्यरत हैं। तुहिन कांता पांडेय का करियर विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी पदों से भरा रहा है। वे अर्थशास्त्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं और वित्तीय नीतियों व प्रशासन में उनका व्यापक अनुभव है। सेबी के अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों के हितों की रक्षा जैसे मुद्दे चर्चा में हैं।