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नशे में स्कूल आया टीचर! बोला- 10 महीने से सैलरी नहीं मिली, PM मोदी पर की आपत्तिजनक टिप्पणी

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संबंधित व्यक्ति अपना नाम सीएस राज बताते हुए खुद को प्रधान पाठक बता रहा है. वहीं विभागीय स्तर पर शिक्षक का नाम प्रदीप कुमार पेंद्रो बताया जा रहा है. ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है.
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के बहेरामुड़ा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में स्कूल के प्रधान पाठक के रूप में पहचान बताने वाला एक व्यक्ति कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आ रहा है. जब उससे शराब पीकर स्कूल आने को लेकर सवाल किया जाता है, तो वह पिछले 10 महीने से वेतन नहीं मिलने की बात कहता दिखाई दे रहा है. वीडियो में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने की बात भी सामने आ रही है. वहीं विभागीय जानकारी में संबंधित शिक्षक का नाम प्रदीप कुमार पेंद्रो बताया जा रहा है. वीडियो वायरल होने के बाद अब शिक्षक के आचरण के साथ-साथ लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के दावे ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति से शराब पीकर विद्यालय आने को लेकर सवाल किया जा रहा है. वीडियो बनाने वाला व्यक्ति पूछता है कि नशे की हालत में स्कूल आने पर बच्चों को क्या संस्कार दिए जाएंगे. इस दौरान संबंधित व्यक्ति बार-बार वेतन नहीं मिलने की बात करता नजर आ रहा है. हालांकि वीडियो में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
10 महीने से वेतन नहीं मिला तो जिम्मेदार कौन?
मामले में सबसे गंभीर सवाल शिक्षक के वेतन को लेकर है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, बहेरामुड़ा का स्कूल अनुदान प्राप्त संस्था है और यहां दो शिक्षकों के भरोसे स्कूल संचालित होने की जानकारी है. यदि वास्तव में शिक्षक को 10 महीने से वेतन नहीं मिला है, तो इसकी वजह क्या है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह भी जांच का विषय है. विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि वेतन भुगतान में देरी क्यों हुई और अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं.
शिक्षक की पहचान और पदस्थापना पर भी सवाल
वीडियो में संबंधित व्यक्ति अपना नाम सीएस राज बताते हुए खुद को प्रधान पाठक बता रहा है. वहीं विभागीय स्तर पर संबंधित शिक्षक का नाम प्रदीप कुमार पेंद्रो बताया जा रहा है. ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है, उसकी वास्तविक पदस्थापना क्या है और विद्यालय में उसकी जिम्मेदारी क्या है.
शिक्षक के आचरण के साथ विभागीय व्यवस्था की भी हो जांच
यदि जांच में शराब के नशे में विद्यालय आने और बच्चों के सामने अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो विभागीय कार्रवाई जरूरी होगी. वहीं 10 महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा भी उतनी ही गंभीरता से जांचा जाना चाहिए. यदि वेतन भुगतान में विभागीय लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. फिलहाल वायरल वीडियो ने शिक्षक के आचरण के साथ शिक्षा विभाग की निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.