भारद्वाज ने लोगों से इंडिया गेट पर आने की अपील करते हुए कहा, ‘पुलिस मुझे इस तरह से उठाकर फेंक रही है जैसे मैं कोई फुटबॉल हूं. पुलिस पैर ऊपर और सिर नीचे करके मुझे उठाकर ले गई. सबने देखा कि ये लोग हमारे साथ कितनी बदतमीजी कर रहे हैं. इतनी पुलिस फोर्स होने के बावजूद ये अपने एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कर रहे हैं और न ही उसे गिरफ्तार कर रहे हैं. जो लोग उस लड़की के हक के लिए यहां शांतिपूर्ण तरीके से खड़े हैं, पुलिस उनके साथ इस तरह की बदतमीजी कर रही है. ये पुलिस वाले आम आदमी को क्या समझते हैं? जब ये नेताओं और पत्रकारों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार कर रहे हैं, तो आम जनता के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे? दिल्ली पुलिस ने बर्बारता की पराकाष्ठा पार कर दी है. केंद्र की भाजपा सरकार को अब जाना ही होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इंडिया गेट पर आएं और इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें.’
‘सवालों से नहीं बच सकती सरकार’
इस दौरान बुराड़ी से AAP विधायक संजीव झा ने कहा कि सत्ता चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, वह जनता के सवालों से भाग नहीं सकती. वोट हमारा है, संविधान हमारा है और लोकतंत्र भी हमारा है. चुनावी प्रक्रिया और वोट के अधिकार को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब चुप्पी, दबाव या पुलिसिया कार्रवाई से नहीं, बल्कि पारदर्शिता और तथ्यों से देना होगा. न सवाल दबेंगे, न आवाज़ रुकेगी, न किसी को जवाबदेही से भागने दिया जाएगा और न ही लोकतांत्रिक अधिकारों पर कोई समझौता होगा.
संजीव झा ने आगे कहा, ‘हम इंडिया गेट से जंतर-मंतर मार्च करने आए थे, लेकिन पुलिस फोर्स ज्ञानेश कुमार जैसे गद्दारों को बचाने की कोशिश कर रही है. ज्ञानेश कुमार ने इस देश के साथ गद्दारी की है, चोरी से भाजपा की सरकार बनाई है और लोगों के वोटिंग राइट को छीना है. जब तक ज्ञानेश कुमार को हटाया नहीं जाता, हमारा यह प्रोटेस्ट जारी रहेगा. एक तरफ सरकार की तानाशाही है और दूसरी तरफ हमारा संघर्ष है. हम अपनी जान की बाजी लगाकर इस देश के जनतंत्र की रक्षा करेंगे और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर ही रहेंगे.’
उधर, कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि देश के गद्दार ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही पड़ेगा. उन्होंने कहा, ‘ज्ञानेश कुमार वोट चोर हैं और उसने गरीबों के वोट काटे हैं. अमित शाह और मोदी उसे बचाना चाहते हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार अब बचेगा नहीं. उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार जैसे गद्दार को इस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. उसने लोगों के वोटिंग राइट को छीना है और चोरी से भाजपा की सरकार बनवाई है. जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाया नहीं जाता और हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक सड़क से लेकर सदन तक, जहां जरूरत पड़ेगी, हमारा यह आंदोलन जारी रहेगा.’
आखिर SIR को लेकर क्या है विवाद?
ये प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इससे वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है.
इसी को लेकर प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. यह विरोध दिल्ली के अलावा मुंबई समेत कई शहरों में भी देखने को मिला है.
वहीं लगातार हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है और प्रदर्शनकारियों को निर्धारित प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की जा रही है.