रायपुर – विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक विवाद के बीच शुक्रवार को रायपुर में कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता निर्वाचन कार्यालय की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की और पुतला दहन भी किया।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने निर्वाचन कार्यालय के आसपास सुरक्षा के लिए कई स्तर की बैरिकेडिंग की थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इनमें से तीन बैरिकेड पार कर लिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झूमाझटकी की स्थिति भी बनी।
SIR को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और कई मतदाताओं के नाम काटे या जोड़े गए हैं।
कांग्रेस ने इन दावों की जांच कराने और मतदाता सूची में हुए बदलावों की प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की है। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची और SIR से जुड़ी सेवाएं जिला प्रशासन के पोर्टल पर भी उपलब्ध हैं।
पुलिस ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पास रोका
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के निर्वाचन कार्यालय की ओर बढ़ने के दौरान पुलिस ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सामने उन्हें रोक दिया। यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों को निर्वाचन कार्यालय के मुख्य परिसर तक पहुंचने से रोक दिया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन किया।
चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में राज्य निर्वाचन कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया था। पार्टी ने SIR को लेकर मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग के खिलाफ कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पार्टी के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।



