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ओवरटाइम घोटाला – करोड़ों के भुगतान का मामला, जांच के बीच सुप्रीम कोर्ट से आरोपी अफसर को मिली राहत

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रायपुर – छत्तीसगढ़ के चर्चित आबकारी मेनपावर और ओवरटाइम भुगतान मामले में आरोपी असिस्टेंट कमिश्नर आबकारी और पूर्व डीजीएम नवीन प्रताप सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष हुई, जिसके बाद नवीन तोमर को अंतरिम राहत दी गई। मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल और शशांक मिश्रा ने पैरवी की। नवीन प्रताप सिंह तोमर से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की याचिका SLP (Crl.) No. 13039/2025 के रूप में सूचीबद्ध रही है।

ED की सूचना के बाद शुरू हुई थी जांच

इस मामले की जांच की शुरुआत नवंबर 2023 में हुई थी। उपलब्ध जांच संबंधी रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय की कार्रवाई के बाद राज्य शासन को जानकारी भेजी गई थी। इसके आधार पर EOW/ACB ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

बाद की न्यायिक कार्यवाही में भी CSMCL से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों का उल्लेख हुआ है।

ओवरटाइम भुगतान को लेकर क्या है आरोप?

जांच एजेंसियों के आरोप के मुताबिक, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में मैनपावर और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए कर्मचारियों के ओवरटाइम अथवा अधिसमय भत्ते के नाम पर बड़ी रकम का भुगतान किया गया।

आरोप है कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान इस मद में ₹100 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जिन कर्मचारियों के लिए अधिसमय भत्ते का प्रावधान था, उन्हें वास्तविक रूप से पूरी राशि नहीं मिली और भुगतान की प्रक्रिया में कथित तौर पर कमीशन की व्यवस्था की गई

एजेंसियों के जरिए भुगतान पर उठे सवाल

मामले में आरोप लगाया गया है कि मैनपावर एजेंसियों को किए गए भुगतान में ओवरटाइम की रकम शामिल थी, लेकिन उसका वास्तविक लाभ संबंधित कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा कथित रूप से कमीशन के तौर पर निकाला और वितरित किया गया।

जांच में इस पूरी प्रक्रिया से राज्य के आबकारी राजस्व को कथित आर्थिक नुकसान होने का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी होना बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

मामले में नवीन प्रताप सिंह तोमर की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित रही है। सुप्रीम कोर्ट की सूची में उनकी याचिका SLP (Crl.) No. 13039/2025 के रूप में दर्ज है।

अब सुनवाई के दौरान उन्हें अंतरिम जमानत मिलने से मामले में नया मोड़ आया है। अंतरिम जमानत का अर्थ मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं है। केस की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।