रायपुर – छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर बड़ी उम्मीद जगी है। नई दिल्ली से लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऐलान किया कि दोनों राज्यों के बीच लंबित महानदी जल विवाद का समाधान अब से तीन माह के भीतर निकल सकता है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुई महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को दोनों राज्यों के हितों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है।
डबल इंजन सरकार से बढ़ा समन्वय
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और दोनों राज्यों में डबल इंजन की सरकार होने के कारण बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित हुआ है, जिससे वर्षों पुराने इस गंभीर विवाद के जल्द और सकारात्मक समाधान की संभावनाएं काफी मजबूत हुई हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी तीन महीनों के भीतर इस दिशा में ठोस परिणाम सामने आएंगे, जिससे दोनों राज्यों के नागरिकों को राहत मिलेगी।
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना का मार्ग प्रशस्त
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान अन्य अहम विकास कार्यों और परियोजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के बाद कटघोरा-डोंगरगढ़ 295 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना का मार्ग प्रशस्त होने की जानकारी दी। साथ ही, प्रदेश में रोजगार के नए अवसरों, प्रधानमंत्री आवास योजनाओं और धान मिलिंग के लिए प्रतिमाह पांच लाख टन चावल उठाए जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से हुई सकारात्मक चर्चा का भी जिक्र किया।
महानदी जल विवाद की टाइमलाइन
वर्ष 1983 से विवाद की शुरुआत: छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी के उपयोग और बैराज निर्माण को लेकर असहमतियां शुरू हुईं, जो आगे चलकर बड़े अंतर्राज्यीय विवाद में बदल गईं।
वर्ष 2016-2018 का दौर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महानदी बेसिन में विभिन्न औद्योगिक और सिंचाई परियोजनाओं के तहत बैराज निर्माण किए जाने पर ओडिशा सरकार ने आपत्ति जताई और पानी रोकने का आरोप लगाया।
वर्ष 2018 (ट्रिब्यूनल का गठन): लंबे कानूनी और राजनीतिक संघर्ष के बाद, केंद्र सरकार ने अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत ‘महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण’ (Mahanadi Water Disputes Tribunal) का गठन किया।
वर्ष 2026 : अब केंद्र और दोनों राज्यों की डबल इंजन सरकारों के बीच हुए समन्वय तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुई हालिया बैठक के बाद, केंद्रीय जल आयोग को अगले तीन महीनों के भीतर इस विवाद का अंतिम समाधान निकालने के लिए अधिकृत किया गया है।