सुप्रीम कोर्ट से पाटन सीट से विधायक और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ा झटका लगा है. अदालत ने उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करने से इनकार कर दिया है, जिससे अब हाईकोर्ट में चुनाव याचिका का ट्रायल जारी रहेगा.
रायपुर / नई दिल्ली – छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधानसभा सीट से विधायक भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सर्वोच्च अदालत ने उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज करने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से मना कर दिया है, जिसमें मेरिट के आधार पर याचिका की सुनवाई करने का निर्देश दिया गया था.इस फैसले के बाद अब पाटन सीट से भूपेश बघेल के विधायक चुने जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर चुनाव ट्रिब्यूनल (हाईकोर्ट) में विचार-विमर्श और ट्रायल प्रक्रिया जारी रहेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, दी यह अहम छूट
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं दिखता. हालांकि, शीर्ष अदालत ने बघेल को राहत देते हुए यह साफ किया कि इस याचिका के खारिज होने से उनके कानूनी अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.अदालत ने कहा कि चुनाव याचिका पर सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल के पास अपना बचाव करने के लिए प्रथम दृष्टया मजबूत कानूनी आधार मौजूद हैं. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कहा है कि वे इलेक्शन ट्रिब्यूनल (हाईकोर्ट) के समक्ष ट्रायल के दौरान अपने सभी पक्ष, तर्क, कानूनी आपत्तियां और बचाव के आधार रख सकते हैं.
आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप
यह पूरा विवाद साल 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान का है. भूपेश बघेल पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में यानी मतदान से पहले के 48 घंटों के ‘मौन काल’ के दौरान रोड शो किया था.याचिकाकर्ताओं का दावा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल का यह कदम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 और आदर्श आचार संहिता का कथित उल्लंघन था. इसी आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग हाईकोर्ट से की गई है.
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने रखी दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से देश के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें पेश कीं. सिब्बल ने अदालत के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का कथित उल्लंघन ‘भ्रष्ट आचरण’ के दायरे में नहीं आता है. इसलिए केवल इस आधार पर किसी जनप्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द करने की मांग कानूनी रूप से सही नहीं है और इसे शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाना चाहिए.



