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रायपुर के गोल बाजार गणपति दरबार पहुंचे CM साय, 117 साल पुरानी परंपरा में हुए शामिल

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रायपुर : गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर का ऐतिहासिक गोल बाजार गणपति बप्पा की भक्ति और उत्सव के रंग में डूबा नजर आया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गोल बाजार पहुंचकर श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा स्थापित भगवान श्री गणेश के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने भगवान गणेश को करीब 771 ग्राम वजन का स्वर्ण मुकुट पहनाया। इस मुकुट की कीमत ₹1 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। मुख्यमंत्री ने गणपति बप्पा की आरती उतारकर छत्तीसगढ़ के प्रत्येक परिवार के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

771 ग्राम के स्वर्ण मुकुट से सजे गणपति बप्पा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप गणेशोत्सव पंडाल में विराजित भगवान श्री गणेश को स्वर्ण मुकुट पहनाया। मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने भगवान गणेश का तिलक किया और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद आरती उतारी।

बताया गया कि भगवान गणेश को पहनाया गया स्वर्ण मुकुट करीब 771 ग्राम का है और इसकी अनुमानित कीमत ₹1.15 करोड़ से अधिक है। करोड़ों रुपये के इस स्वर्ण मुकुट से सजे गणपति बप्पा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं। गणेशोत्सव केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाली हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि गणपति बप्पा की कृपा से छत्तीसगढ़ विकास और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़े और प्रदेश के हर घर में सुख-शांति एवं खुशहाली बनी रहे।

117 साल से जारी है गणेशोत्सव की परंपरा

गोल बाजार के गणेशोत्सव की सबसे खास बात इसकी 117 वर्षों से चली आ रही परंपरा है। मुख्यमंत्री ने इस गौरवशाली परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था और सामाजिक सहभागिता के साथ किसी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखना अपने आप में विशेष उपलब्धि है।

श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा गोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप पिछले 117 वर्षों से गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। अपनी भव्यता और आकर्षक स्वरूप के चलते यहां विराजित गणपति रायपुर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।