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छत्तीसगढ़ में ढहाए जाएंगे जर्जर भवन, कलेक्टर और एसपी को सीएम ने दिए निर्देश, होगा सेफ्टी ऑडिट

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रायपुर – दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जर्जर भवनों के प्रति कड़ाई की है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि जर्जर भवन ढहाए जाएं और कलेक्टर-एसपी अपने-अपने क्षेत्रों में भवनों की नियमित निगरानी करें।

अधिकारी सुनिश्चित करें कि शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हो। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
लापरवाही हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही हुई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संभावित खतरों की पहचान कर समय पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि किसी घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।
तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया। जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएं, वहां समय-सीमा निर्धारित कर सुधार सुनिश्चित करने की बात कही गई।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, सीएम के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल व अन्य मौजूद रहे।
मिलावटी शराब पर भी दिखाएं सख्ती : सीएम
मुख्यमंत्री ने अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, ताकि अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। निकायों में जर्जर भवनों को केवल नोटिस नगर निगमों की स्थिति भी गंभीर है, जहां हजारों जर्जर भवनों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। केवल नोटिस थमाए जा रहे हैं।
ये जर्जर स्कूल-कॉलेज भवन खतरे की दे रहे आहट
नईदुनिया की पड़ताल में यह सामने आया है कि वर्तमान में 3,931 स्कूल और छात्रावास भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इनमें 2,859 प्राइमरी, 976 मिडिल, 17 हाई स्कूल और 79 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं।
राज्य में 878 स्कूलों के पास अपना कोई भवन नहीं है। उच्च शिक्षा के हालात भी चिंताजनक हैं, जहां 111 सरकारी कालेज बिना भवन के चल रहे हैं। इनमें ज्यादातर भवन जर्जर हैं। ढाई हजार आंगनबाड़ी केंद्र भी जर्जर हालत में हैं।