जानकारी के अनुसार, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बिलासपुर से अंबिकापुर की ओर आ रही थीं। रात लगभग 12:30 बजे उनका काफिला लहपटरा टोल नाके पर पहुंचा। काफिले में दो गाड़ियां शामिल थीं। सबसे आगे चल रही इनोवा गाड़ी ने जैसे ही टोल बैरियर पार किया, स्वचालित प्रणाली के तहत बूम नीचे गिर गया। ठीक पीछे आ रही मंत्री की फॉर्च्यूनर कार के ऊपर बूम गिरने से गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के तुरंत बाद मंत्री का पीए ओम प्रकाश राजवाड़े सुरक्षाकर्मियों के साथ वाहन से उतरा और टोल बूथ पर पहुंचकर कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। पीड़ित कर्मचारी अपनी गलती न होने की बात कहते हुए माफी मांगता रहा, लेकिन पीए ने कई थप्पड़ जड़ दिए। इस दौरान मंत्री लक्ष्मी अपनी गाड़ी में ही बैठी रहीं। बाद में मंत्री के सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया और पीए को वापस वाहन में ले आए।
टोल कर्मचारियों के अनुसार प्रधानमंत्री की अपील के बाद मंत्री ने अपने काफिले का आकार घटा दिया था और फॉलो वाहन हटा दिया था। आगे चल रही गाड़ी के निकलने पर टोल तंत्र ने नियमानुसार बूम को नीचे गिरा दिया। टोल कर्मी यह नहीं समझ सके कि पीछे आ रहा वाहन मंत्री का है। यदि काफिले में फॉलो वाहन होता, तो कर्मचारी पहले से ही सतर्क होकर बूम को उठाकर रखते।
घटना के बाद गुरुवार को पीड़ित टोल कर्मचारी महेंद्र राजवाड़े अन्य कर्मियों व ग्रामीणों के साथ लखनपुर थाने पहुंचे और आरोपी पीए के खिलाफ शिकायत पत्र सौंपा। पुलिस ने पीड़ित का चिकित्सीय परीक्षण (एमएलसी) कराया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुलिस मंत्री के प्रभाव में आकर प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने जल्द प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण आंदोलन करने को विवश होंगे।