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नेपाल बाढ़ में 359 की मौत, 288 भारतीय लापता; भारतीयों की मदद के लिए भारत सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम

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नेपाल में बुधवार को आई भयंकर त्रासदी में मृतकों का आंकड़ा 150 के पार पहुंच गया है। तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ अपने रास्ते में सबकुछ बहाकर ले गई। इस बाढ़ में कई पुल, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। एक हजार के करीब लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और इनमें 133 भारतीय भी शामिल हैं। 
भारतीयों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय ने बनाया कंट्रोल रूम

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया है। 27 अगस्त शाम 6:45 बजे तक 285 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि त्रिशूली-1 परियोजना के 33 कर्मचारियों और तमिलनाडु के 21 लोगों को बचाया गया है। मंत्रालय ने सहायता के लिए फोन, व्हाट्सऐप और ईमेल नंबर जारी किए हैं। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू की गई है। बाढ़ में अब तक 359 लोगों की मौत हो चुकी है।

पीएम बालेन शाह ने बाढ़ प्रभावित नुवाकोट का दौरा किया

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बृहस्पतिवार को बाढ़ प्रभावित नुवाकोट जिले का दौरा किया और जारी खोज एवं बचाव अभियान की समीक्षा की। उन्होंने बट्टार बाजार स्थित सेना प्रशिक्षण केंद्र में अधिकारियों से मौजूदा हालात की जानकारी ली। नुवाकोट के देवीघाट इलाके में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सड़कें और मकान क्षतिग्रस्त होने से कई परिवार बेघर हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ लोग अब भी लापता हैं। एक निवासी जनक बहादुर नेपाली ने बताया कि उनका घर पूरी तरह तबाह हो गया है और लोगों को भोजन व रहने की व्यवस्था में परेशानी हो रही है।Nepal Flash Floods 288 Indians Missing In 21 Rescued Death Toll Touches 270

नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 332 हुई, लापता लोगों की तलाश जारी
बुधवार को आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 332 हो गई। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी रखा है। सबसे ज्यादा शव चितवन और नवलपरासी ईस्ट में बरामद किए गए हैं। अधिकारियों की ओर से प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
बाढ़ के बाद राहत अभियान तेज, काठमांडो से 40 से ज्यादा निजी हेलिकॉप्टर उड़ानें

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। गुरुवार को काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 40 से ज्यादा निजी हेलिकॉप्टरों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए उड़ान भरी। इनमें रासुवा समेत कई प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं।India sends relief to Nepal after massive flash floods kill 8, 400 missing including 105 Indians - The Economic Times

नेपाल सेना इन उड़ानों का समन्वय कर रही है। राहत सामग्री को संग्रह केंद्र से निजी हेलिकॉप्टरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सेना की 14वीं बटालियन संभाल रही है। दोपहर दो बजे तक 40 से ज्यादा उड़ानें पूरी हो चुकी थीं, जबकि 20 से अधिक हेलिकॉप्टर हवाई अड्डे पर तैयार रखे गए थे।

गृह मंत्रालय भी राहत और बचाव के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद कुछ हेलिकॉप्टरों को इस्तेमाल करने की तैयारी में है। नेपाल सेना के हेलिकॉप्टर लगातार प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है। नेपाल पुलिस के अनुसार, गुरुवार को 93 और शव बरामद किए गए। सुरक्षाकर्मी और स्थानीय लोग मलबा हटाकर बंद सड़कों को फिर से खोलने में जुटे हैं।नेपाल में आई भयावह बाढ़ कैसे पूरे बाज़ार को बहा ले गई, 160 से ज़्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों लापता - BBC News हिंदी

नेपाल के विदेश मंत्री बोले- यह हाल के समय की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में एक

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानाल ने कहा है कि भीषण बाढ़ ने कुछ ही घंटों में कई कस्बों और बस्तियों को तबाह कर दिया। उन्होंने इसे हाल के समय में देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक बताया। मंत्री के अनुसार, हजारों लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं और बड़ी संख्या में परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं। खानाल ने आगे ये भी कहा कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में स्थिति का पूरा आकलन अभी जारी है। उन्होंने भारत और अन्य देशों से मिली मदद के लिए आभार जताया और कहा कि तत्काल राहत के साथ लंबे समय तक पुनर्निर्माण की भी जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के ज्यादातर प्रमुख पर्यटन क्षेत्र इस आपदा से प्रभावित नहीं हुए हैं। पोखरा, काठमांडू, चितवन, लुंबिनी और एवरेस्ट क्षेत्र में पर्यटन जारी है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने के खतरे से निपटने के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

100 भारतीय और 25 चीनी नागरिक मिले

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, लापता लोगों में से 100 भारतीय नागरिक और 25 चीनी कामगार मिल गए हैं। राहत और आपदा प्रबंधन विभाग के लोगों ने भारतीयों और चीनी नागरिकों को ढूंढ निकाला है। नेपाल सरकार के हवाले से रिपोर्ट में ये दावा किया गया है।

नेपाल बाढ़: 177 की मौत, 800 से ज्यादा लापता; टिमुरे में 21 भारतीयों को बचाया गया

नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 177 हो गई है, जबकि 800 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल पुलिस ने मृतकों की संख्या को लेकर अपडेट दिया। बताया कि गुरुवार सुबह 10 बजे तक 177 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। इस आपदा में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

ये शव भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के किनारे बसे कई जिलों से बरामद किए गए, जिनमें रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी (पूर्व) और नवलपरासी (पश्चिम) शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर शव नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाके चितवन से बरामद किए गए।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि नेपाली सेना ने गुरुवार सुबह बचाव अभियान चलाया और बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक, टिमुरे से 95 नेपाली नागरिकों और 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, गुरुवार सुबह 11 बजे तक 826 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इनमें से 579 पर्यटक थे, हालांकि अथॉरिटी ने यह साफ नहीं किया कि वे विदेशी पर्यटक थे, घरेलू पर्यटक थे या दोनों।

इसी तरह, रसुवा और नुवाकोट जिलों से नेपाली सेना के 48 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान, आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) के 13 जवान और 162 अन्य लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। इस बीच, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बताया कि प्रधानमंत्री शाह गुरुवार सुबह नुवाकोट जिले की बाढ़ प्रभावित बिदुर नगर पालिका आपदा ग्रस्त इलाकों का जायजा लेने पहुंचे।

दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट मिनिस्टर बाढ़ से हुए भौतिक नुकसान का आकलन करेंगे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ राहत, पुनर्वास और बाधित बुनियादी ढांचा सेवाओं को फिर से शुरू करने पर चर्चा करेंगे। पीएमओ ने कहा कि उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे सभी बाढ़ पीड़ित इलाकों में तेजी से राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में तेजी लाने के लिए जरूरी निर्देश जारी करेंगे।

भारत सरकार ने जारी किए नेपाल में भारतीय दूतावास के आपात नंबर

भारत सरकार ने नेपाल में मौजूद भारतीय दूतावास से संपर्क के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। ये नंबर हैं-
+977 985 131 6807,
+977 970 910 7500,
+977 981 032 6117

मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 177 हुआ

नेपाल बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 177 हो गया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 826 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है, जिनमें 300 से ज्यादा भारतीय हैं।

नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद केरल के 53 लोग फंसे, इनमें बच्चे भी शामिल

केरल सरकार की एजेंसी NORKA रूट्स ने कहा है कि नेपाल की बाढ़ में केरल के 53 लोग फंसे हुए हैं।  NORKA रूट्स, विदेश में रहने वाले केरल के लोगों के मामलों और कल्याणकारी सेवाओं का कामकाज देखती है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NORKA रूट्स के CEO राजेश माधवन ने बताया, ‘इससे हमने लगभग 53 केरलवासियों की पहचान की, जिनमें परिवार के सदस्य, वयस्क और बच्चे शामिल हैं।’

माधवन ने बताया कि NORKA रूट्स के पास इन सभी 53 लोगों के संपर्क नंबर हैं, लेकिन नेटवर्क की समस्या के कारण अभी उनसे सीधे संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम अभी तक सीधे संपर्क नहीं कर पाए हैं, लेकिन हमें सामान्य तौर पर यह पता है कि वे सुरक्षित हैं।’

नेपाल में आई तबाही पर संघ ने जताया दुख, मदद के लिए बढ़ाए हाथ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नेपाल में आई तबाही पर गहरा दुख जताया है। साथ ही संगठन ने नेपाल की हरसंभव मदद की भी पेशकश की है। संघ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर नेपाल की त्रासदी पर दुख जताया। साथ ही कहा हम पीड़ितों की मदद के लिए तैयार हैं और हरसंभव मदद करने का प्रयास करेंगे। दरअसल तिब्बत में एक ग्लेशियर ने टूटकर भोटेकोशी नदी की सहायक ल्हेंदे नदी के प्रवाह को रोक दिया। इससे एक झील बनी, जो पानी के दबाव में टूटकर नेपाल-चीन बॉर्डर पर स्थित रसुवागढ़ी में भारी तबाही लाई।

तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में दी लापता लोगों की जानकारी

तमिलनाडु के मंत्री राजमोहन ने विधानसभा को बताया कि सरकार बचाव कार्य और तमिलनाडु के मानसरोवर यात्रा तीर्थयात्रियों की स्थिति पर नजर रख रही है, और 20 तीर्थयात्रियों को वापस लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री राजमोहन ने कहा कि चेन्नई की एक टूर एजेंसी 57 लोगों के अलावा 49 तीर्थयात्रियों को भी मानसरोवर यात्रा पर ले गई थी, और उनके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।

नेपाल की मदद के लिए आगे आए दुनिया के कई देश

नेपाल में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। ऐसे में दुनिया के कई देश नेपाल की मदद के लिए आगे आए हैं। भारत ने बड़ी संख्या में राहत सामग्री नेपाल रवाना की है। वहीं अमेरिका ने नेपाल की आर्थिक मदद करने का एलान किया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र भी नेपाल सरकार के साथ मिलकर नेपाल में राहत और बचाव अभियान चला रहा है। यूरोपीय संघ ने भी नेपाल की मदद की पेशकश की है।

नेपाल बाढ़ में मृतकों का आंकड़ा 175 हुआ

नेपाल में बुधवार को आई त्रासदी में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 175 हो गया है। नेपाल सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सैंकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें 28 देशों के 476 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि लापता लोगों में नेपाली सेना के 44, नेपाली पुलिस के 28 और नेपाल सशस्त्र बलों के 13 जवान भी लापता हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने कहा है कि लापता लोगों में 579 पर्यटक है।

नेपाल बाढ़ पर दुनियाभर के नेताओं ने जताया शोक, हर संभव मदद को लेकर दिखाई एकजुटता

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 162 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सुरक्षाकर्मियों और पर्यटकों समेत सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। इस त्रासदी को लेकर दुनियाभर के नेताओं ने दुख जताते हुए नेपाल और पीड़ित लोगों के साथ एकजुटता जाहिर की। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने त्रासदी को लेकर गहरा दुख जताते हुए यूरोप की ओर से अधिक से अधिक सहायता की बात कही।

यूरोपीय संघ की अध्यक्ष ने जताया दुख
अध्यक्ष उर्सुला वॉन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ‘नेपाल और चीन में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई समुदायों को बुरी तरह प्रभावित किया है। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जो इस आपदा से प्रभावित हुए हैं, खासकर उन परिवारों के साथ जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है या जो अब भी उनके बारे में किसी खबर का इंतजार कर रहे हैं। हम उन बहादुर राहत और बचाव कर्मियों को भी याद कर रहे हैं जो कठिन परिस्थितियों में लोगों की मदद कर रहे हैं।’

उन्होंने बताया कि नेपाल में प्रभावित इलाकों का नक्शा तैयार करने और जमीनी स्तर पर राहत कार्यों में सहायता देने के लिए कोपरनिकस प्रणाली को सक्रिय किया गया है। यूरोपीय संघ जरूरत पड़ने पर और अधिक सहायता देने के लिए भी तैयार है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बोले- राहत और बचाव कार्यों में सहयोग कर रहे
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, ‘नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ से मुझे गहरा दुख हुआ है। इस आपदा में कई लोगों की जान गई है, कई लोग लापता हैं और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। इस आपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति मेरी पूरी एकजुटता और सहानुभूति है।’

नेपाल में संयुक्त राष्ट्र सरकार के नेतृत्व में चलाए जा रहे राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय सहायता से जुड़े साझेदार संगठन बाढ़ प्रभावित समुदायों की मदद के लिए राहत सामग्री और कर्मियों को तेजी से जुटा रहे हैं।

नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसन ने भी इस आपदा पर गहरा दुख जताते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ‘नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति हम गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हैं। वहीं, जो लोग अपने परिवार या करीबी लोगों की खबर का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें हम हिम्मत और शक्ति की कामना करते हैं। हम कठिन परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्य कर रहे नेपाली अधिकारियों और आपदा राहतकर्मियों के प्रयासों की सराहना करते हैं। हम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जिसमें प्रभावित क्षेत्र में मौजूद डच नागरिकों की स्थिति भी शामिल है।’

जापान की प्रधानमंत्री ने भी संवेदनाएं जाहिर कीं
वहीं, जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने भी नेपाल बाढ़ त्रासदी पर दुख व्यक्त किया। तकाइची ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ‘नेपाल में आई व्यापक बाढ़ के मद्देनजर, मैं नेपाल सरकार और नेपाल की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पांच जापानी नागरिक लापता हैं, जो मेरे लिए गहरी चिंता का विषय है। नेपाल स्थित जापानी दूतावास ने उनसे संपर्क करने की कई कोशिशें की हैं, लेकिन अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। दूतावास ने उनकी तलाश में सहायता का अनुरोध भी किया है।’

कस्टम अधिकारी ने बताया- पानी की 100 मीटर ऊंची लहर ने सबकुछ किया तबाह

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रसुवा में मुख्य कस्टम अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि जब वे बाहर भागे, तो उन्होंने पानी की एक दीवार देखी जो ऊपर की तरफ से तिमुरे बाजार की ओर तेजी से बढ़ रही थी और उसके पीछे धुएं का गुबार जैसा कुछ दिख रहा था। ढुंगाना ने नेपाली मीडिया को बताया, ‘यह बाढ़ थी, जो लगभग 100 मीटर ऊंची लहर की तरह उठ रही थी और उसने बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही पल में बाजार खत्म हो गया।’

नेपाल सरकार ने बयान जारी कर दी जानकारी
  • नेपाल सरकार ने एक बयान जारी कर बताया है कि अब तक 162 शव मिल चुके हैं। इनमें से 27 शव धाडिंग में, 12 नुवाकोट में, दो शव रसुवा में, 20 गोरखा में, 26 नवालपारासी पूर्व में, 9 तानाहुन में, 64 चितवन में और 5 शव नवालपारासी पश्चिम से बरामद हुए हैं।
  • विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है। करीब सात सौ लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में नेपाली सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान, नेपाल सशस्त्र बल के 12 जवान भी लापता हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग ने बताया है कि 579 पर्यटक लापता हैं, जिनमें से 466 विदेशी और 113 नेपाली पर्यटक शामिल हैं।
  • नेपाल सरकार ने बताया है कि 132 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इनमें 111 नेपाली नागरिक और 21 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
  • भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से 14 सस्पेंशन पुल, 25 परिवहन पुल और 40 किलोमीटर लंबाई की सड़क तबाह हो गई है। बाढ़ की चपेट में आकर 63 लोग घायल हुए हैं।
ईशा फाउंडेशन के तीर्थयात्री फंसे, नहीं हो पा रहा उनसे संपर्क

नेपाल में आई बाढ़ में ईशा फाउंडेशन के कई तीर्थयात्री भी फंसे हुए हैं। फाउंडेशन की समन्वयक मां गंभीरी ने बताया कि अभी तक ईशा फाउंडेशन के तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों से कुछ जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सबकुछ पता चला जाएगा। उन्होंने बताया कि इस साल कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले हमारे 21 समूह हैं। कई समूह अपनी तीर्थयात्रा पूरी कर चुके हैं, जबकि अन्य रास्ते में हैं।  वहीं कुछ शुरू करने वाले हैं।

नेपाल के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज, सेना-पुलिस की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटीं

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने गुरुवार को जानकारी कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने सुबह से ही तटीय और प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत अभियान तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘बुधवार को रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने आज सुबह से ही तटीय और प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत अभियान तेज कर दिए हैं। नेपाली सेना ने बुधवार रात ही प्रभावित इलाकों में जरूरतमंद नागरिकों की मदद के लिए खाने-पीने की जरूरी चीजें, टेंट और दवाइयां जैसी राहत सामग्री पहुंचा दी थी।’

पोस्ट में कहा गया, ‘सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर भी बचाव और खोज अभियानों में काफी मदद और सहयोग कर रहा है। बुधवार को जैसे ही बाढ़ आई, नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स की टीमों के साथ-साथ सेना और प्राइवेट सेक्टर के हेलीकॉप्टरों को लगाकर बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। सेना की टीम ने पूरी रात लगातार बचाव अभियान चलाया।’

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि गुरुवार सुबह से ही तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नदी के किनारे वाले इलाकों में नेपाली सेना और प्राइवेट सेक्टर के हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ पैदल टीमों को और अधिक सक्रिय करके फंसे हुए लोगों को बचाने और लापता लोगों की खोज का काम तेज कर दिया गया है। सरकार ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है और अपना पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्यों पर केंद्रित किया है।

नेपाल में मची इस तबाही में अब तक 162 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल पुलिस के अनुसार, रसुवा में 2, नुवाकोट में 12, धादिंग में 27, चितवन में 64, गोरखा में 20, तनहुं में 9, एनपी पूर्व में 26 और एनपी पश्चिम में 2 लोगों के शव मिले हैं। अभी सैकड़ों पर्यटक, मजदूर और अन्य लोग लापता हैं। रसुवा जिले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में सबसे अधिक तबाही हुई। बाढ़ ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ इलाकों में आवाजाही ठप हो गई। बताया गया कि यह पानी तिब्बत की तरफ से आया था।

नेपाल की बाढ़ का पानी बिहार में गंडक बैराज पहुंचा, स्थिति सामान्य 

नेपाल में आई बाढ़ का पानी बुधवार देर रात गंडक बैराज, वाल्मीकिनगर पहुंच गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, रात करीब 8:30 बजे तक बैराज में जलश्राव में लगभग 20 हजार क्यूसेक की वृद्धि दर्ज की गई है। अनुमान है कि रात 11 बजे तक जलश्राव अपने चरम पर पहुंच सकता है, जिसके बाद इसमें कमी आनी शुरू हो जाएगी। विभाग ने बताया कि गंडक नदी में अधिकतम जलश्राव करीब दो लाख क्यूसेक रहने की संभावना है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसे सामान्य रहने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद विभाग की ओर से बैराज, तटबंधों और नियंत्रण कक्षों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

जल संसाधन विभाग के मुताबिक, इस वर्ष 14 जुलाई को गंडक नदी में अधिकतम जलश्राव 2,24,000 क्यूसेक दर्ज किया गया था। वहीं, वर्ष 2024 में 28 सितंबर को गंडक में जलश्राव 5,62,500 क्यूसेक तक पहुंच गया था। इन आंकड़ों की तुलना में इस बार संभावित अधिकतम जलश्राव काफी कम रहने का अनुमान है।

विभाग ने कहा है कि नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लगातार निगरानी की जा रही है। गंडक बैराज पर अधिकारियों और कर्मियों को अलर्ट मोड में रखा गया है। तटबंधों की निगरानी के साथ-साथ नियंत्रण कक्षों से भी नदी के जलस्तर और जलश्राव की लगातार जानकारी ली जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए पूरी तरह सतर्क रहना जरूरी है। संबंधित अधिकारियों को किसी भी परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है। जल संसाधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि घबराएं नहीं, सतर्क रहें।

बता दें कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति और गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका के बीच बिहार सरकार ने संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बढ़ा दी है। उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को कहा कि नेपाल से लगातार जलप्रवाह को लेकर जानकारी मिल रही है और संभावित स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है।