चंदखुरी से राजा मोरध्वज की नगरी आरंग तक कैबिनेट मंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं युवराज गुरु खुशवंत साहेब जी के नेतृत्व में निकली तीन दिवसीय 71 किलोमीटर लंबी सामाजिक सद्भाव विशाल कांवड़ यात्रा का समापन हुआ।
रायपुर – कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विभाग के कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी के नेतृत्व में आयोजित तीन दिवसीय 71 किलोमीटर लंबी सद्भावना कांवर यात्रा ने सामाजिक एकता, प्रेम, भाईचारे और समानता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।
यह यात्रा माता कौशल्या मंदिर, चंदखुरी से पंचमुखी महादेव मंदिर, आरंग तक निकाली गई। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। यात्रा का उद्देश्य समाज में आपसी सद्भाव, भाईचारे और समानता की भावना को मजबूत करना रहा।
समापन अवसर पर राखी बांधकर दिया भाई-बहन के प्रेम और सद्भाव का संदेश
सद्भावना कांवर यात्रा के समापन अवसर पर कुमारी भास्कर ने मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को राखी बांधी। इस अवसर ने भाई-बहन के प्रेम, सम्मान और सामाजिक सद्भाव की भावना को और मजबूत किया।
समोदा में संध्याकालीन कार्यक्रम बना यात्रा का विशेष आकर्षण, डॉ. रमन सिंह जी हुए शामिल
यात्रा के दूसरे दिन समोदा में आयोजित संध्याकालीन कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी इस कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने कांवड़ियों और आयोजन से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ाया। समोदा में आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने धार्मिक आस्था के साथ छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव को भी सामने रखा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और सर्वसमाज के लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। यहां से सामाजिक सद्भाव का संदेश और अधिक व्यापक रूप से जनमानस तक पहुंचा। डॉ. रमन सिंह जी की मौजूदगी और गुरु खुशवंत साहेब जी के नेतृत्व में आगे बढ़ती यात्रा ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता एक-दूसरे के पूरक बनकर समाज को जोड़ने का कार्य कर सकते हैं।
चंदखुरी से आरंग तक गांव-गांव में मिला अभूतपूर्व जनसमर्थन
यात्रा के प्रथम दिवस चंदखुरी से प्रारंभ होकर चंदखुरी फार्म, नगपुरा, मौली माता चौक, सकरी, अमेरी, टेकारी, डीघारी मोड़ होते हुए नारा पहुंची, जहां रात्रि विश्राम हुआ। नारा में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय एवं सांस्कृतिक रंग से भर दिया।
द्वितीय दिवस यात्रा नारा से भानसोज, जरोद मोड़, छतौना बस्ती, फरफौद, गुरेह्रा, परसकोल, गुमटा, कोसरंगी मोड़, बाना और बनरसी होते हुए समोदा पहुंची। पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने कांवड़ियों का स्वागत किया।
अंतिम दिवस समोदा से आरंग की ओर बढ़े कांवड़ियों के कारवां का भी जगह-जगह आत्मीय स्वागत हुआ। ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा, राउत नाचा, जसगायन और सेवा-सत्कार के माध्यम से कांवड़ियों का उत्साह बढ़ाया। गांवों में उमड़ा जनसमर्थन यात्रा के सामाजिक संदेश को व्यापक स्वीकार्यता मिलने का प्रमाण बना।






