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’10-10 लाख में MBBS की डिग्री’, 70-80 हजार की नौकरी, NHM की ‘लापरवाही’ से एमपी में फर्जी डॉक्टरों की भर्ती

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मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अभी तक 12 डॉक्टरों की डिग्री फर्जी पाए गए हैं। अब सरकार ने 2000 से अधिक डॉक्टरों की डिग्री की जांच के आदेश दिए हैं।

भोपाल – मध्य प्रदेश में एमबीबीएस की फर्जी डिग्री से नकली डॉक्टरों का एक बड़ा जाल फैल गया है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधर पर ये लोग सरकारी नौकरी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर कर रहे थे। ऐसे में सवाल है कि क्या इंटरव्यूर आंख मूंदकर इन्हें नौकरी बांट रहे थे। फर्जी डिग्री वाले डॉक्टरों ने मेडिकल साइंस के सवालों का जवाब कैसे दिया होगा। अभी तक मध्य प्रदेश में 12 फर्जी डॉक्टर पकड़े जा चुके हैं।

मेडिकल काउंसिल के असली रजिस्ट्रेशन नंबरों का इस्तेमाल

इस मामले में हद तो तब हो गई, जब इन फर्जी डॉक्टरों ने असली डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल किया है। मगर एनएचएम की अंधेरगर्दी की वजह से फर्जी डॉक्टर सिस्टम में घुस गए। रैकेट पर्दाफाश सबसे पहले दमोह में हुआ। यहां नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संचालित होने वाले संजीवनी क्लिनिक में तीन फर्जी डॉक्टर नौकरी कर रहे थे। आरोपियों की पहचान डॉ कुमार सचिन यादव, डॉ राजपाल और डॉ अजय मौर्य के रूप में हुई है।

तीनों कर रहे थे नौकरी

पकड़े गए आरोपी सचिन यादव और राजपाल दमोह के सरकारी हेल्थ सेंटर और संजीवनी क्लिनिक में नौकरी करते थे। वहीं, अजय जबलपुर के संजीवनी क्लिनिक में था। दो साल से ज्यादा समय तक बिना किसी रोक-टोक के डॉक्टर के तौर पर सरकारी नौकरी करते रहे।

रजिस्ट्रेशन नंबर में किया बदलाव

वहीं, आरोपियों ने कथित तौर पर 2018 के एक रजिस्ट्रेशन नंबर में बदलाव किया था, ताकि ऐसा लगे कि इसे 2023 में जारी किया गया था। असल में वह रजिस्ट्रेशन नंबर डॉ अभिषेक यादव का था। वह नर्मदापुरम में तैनात हैं। जांच करने वालों को शक है कि नकली एमबीबीएस डिग्री और जाली मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन कथित तौर पर आठ लाख से 10 लाख रुपए में खरीदे गए थे।

फर्जी डॉक्टरों का बड़ा रैकेट
  • मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों का बड़ा रैकेट चल रहा
  • दमोह में कुछ साल पहले पकड़ा गया था फर्जी हार्ट डॉक्टर
  • उसने कई मरीजों का किया था गलत ऑपरेशन
  • अब दमोह में ही पकड़े गए हैं गए फर्जी डॉक्टर
  • सरकार ने दो 2000 मेडिकल डॉक्टरों की डिग्री की जांच के आदेश दिए
फर्जी डिग्री से बने डॉक्टर

जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि यादव के बीडीएस की असली डिग्री है और राजपाल गौर के पास बीएचएमएस की योग्यता है। दोनों कथित दौर पर एमबीबीएस की फर्जी डिग्री हासिल की और नौकरी पा ली। । हर दिन ये फर्जी डॉक्टर 30 से 40 मरीजों का इलाज करते थे। नौकरी के दौरान इनलोगों ने हजारों मरीजों का इलाज किया। साथ ही उन्हें दवाएं दी।

70 से 80 हजार रुपए तक थी सैलरी

मेडिकल काउंसिल की रजिस्ट्रेशन नंबरों की जांच ऑनलाइन हो जाती है। बिना जांच के ही इन्हें नियुक्ति दे दी गई। आरोपियों को हर महीने सैलरी के रूप में 70 से 80 हजार रुपए मिलते थे।

2000 से अधिक डॉक्टरों की डिग्री की जांच की

वहीं, इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद मध्य प्रदेश के संजीवनी क्लिनिक में 2000 से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट वाले डॉक्टरों की डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन के वेरिफिकेशन का आदेश दिया था। चुनाभट्टी पुलिस ने नौ आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इनके कागज फर्जी पाए गए हैं।