Home छत्तीसगढ़ शासन-प्रशासन की निष्क्रियता से नाराज ग्रामीणों ने खुद कसा शिकंजा

शासन-प्रशासन की निष्क्रियता से नाराज ग्रामीणों ने खुद कसा शिकंजा

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नारा और टेकारी में असामाजिक गतिविधियों पर रोक के लिए ग्रामीण व्यवस्था लागू

रायपुर 28 जुलाई 2026। मंदिर हसौद थाना क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब, गांजा, नशीली गोलियों और जुए जैसी असामाजिक गतिविधियां बढ़ने से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब खुद मोर्चा संभाल लिया है। शासन-प्रशासन से लगातार गुहार के बाद भी रोक न लगने पर ग्राम नारा और टेकारी के ग्रामीणों ने बैठक कर ग्रामीण व्यवस्था के तहत सख्ती बरतने का फैसला लिया है।

नारा में सर्वसम्मत प्रस्ताव, दंड और पुरस्कार का ऐलान
ग्राम नारा में बीते दिनों हुई ग्रामीणों की बैठक में असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि:

इन गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले असामाजिक तत्वों को ग्रामीण व्यवस्था के तहत दंडित किया जाएगासूचना देने वालों को समुचित पुरस्कार दिया जाएगाफसल बचाने के लिए कारगर व्यवस्था की जाएगी गांव में किए गए अवैध कब्जों को हटाया जाएगाग्रामीणों के अनुसार निर्णय के बाद फिलहाल गांव में असामाजिक तत्व दुबक गए हैं।

टेकारी में सार्वजनिक रूप से शराब पर रोक, निगरानी जारी

ग्राम टेकारी में पिछले माह हुई बैठक में सार्वजनिक स्थलों पर पीने-पिलाने पर प्रतिबंध लगाने और लिप्त तत्वों से स्वेच्छा से तौबा करने का आग्रह किया गया था। दुकानदारों से अनुरोध किया गया था कि वे सिर्फ सामने बैठकर पानी/कोल्डड्रिंक पीने वालों को ही पानी पाउच और डिस्पोजल गिलास दें।

ग्रामीणों का कहना है कि इस अनुरोध का कुछ असर हुआ है, लेकिन अभी भी करीब 30% सुधार बाकी है। अभी भी कुछ लोग खेल मैदान, तालाब पार, सहकारी गोदाम और दुकानों की ओट में चोरी-छिपे शराब-गांजा पी रहे हैं। कुछ दुकानदार भी गुपचुप तरीके से पानी पाउच उपलब्ध करा रहे हैं। इन सभी की जानकारी ग्राम प्रमुखों को दी जा रही है और आबकारी व पुलिस कार्रवाई के लिए उचित मौके की तलाश की जा रही है।

आसपास के गांवों में भी स्थिति चिंताजनक

ग्रामीणों के अनुसार आरंग क्षेत्र के भानसोज, खरोरा के खौली और मंदिर हसौद के कठिया में खुलेआम अवैध शराब बिक रही है। इससे नारा, टेकारी के साथ अमेरी और संकरी जैसे नजदीकी गांवों का माहौल भी अशांत बना हुआ है।ग्रामवासी लगातार शिकायत कर रहे हैं कि अवैध शराब, गांजा और छुटपुट चोरी की घटनाओं पर प्रशासन प्रभावी रोक नहीं लगा पा रहा है, जिसके कारण उन्हें ग्रामीण स्तर पर व्यवस्था बनाकर शिकंजा कसना पड़ रहा है।