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राहुल गांधी विपक्षी सांसदों के साथ गांधी स्मृति पहुंचे, जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद

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 पेपर लीक विवाद के बीच राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के सांसद गांधी स्मृति पहुंचे। छात्रों को श्रद्धांजलि देने के साथ सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ाया गया। वहीं जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवा भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई।
नई दिल्ली – पेपर लीक विवाद को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में विपक्ष का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों के साथ तीस जनवरी मार्ग स्थित गांधी स्मृति पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उन छात्रों को श्रद्धांजलि देने के लिए है, जिन्होंने कथित तौर पर NEET पेपर लीक के बाद अपनी जान गंवाई। साथ ही उन्होंने कहा कि घायल छात्रों और न्याय की मांग कर रहे युवाओं के साथ पूरा विपक्ष खड़ा है।

गांधी स्मृति पहुंचकर छात्रों के समर्थन का संदेश

राहुल गांधी ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसद शांतिपूर्ण तरीके से गांधी स्मृति जा रहे हैं, ताकि उन छात्रों को याद किया जा सके जो पेपर लीक के बाद गंभीर मानसिक दबाव का सामना करते हुए अपनी जान गंवा बैठे। उन्होंने कहा कि जो छात्र आज न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, उनके साथ विपक्ष मजबूती से खड़ा है।प लगाया कि प्रशासन ने जगह-जगह बैरिकेडिंग कर विपक्ष को रोकने की कोशिश की। वहीं रेणुका चौधरी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है और इससे डरने का सवाल ही नहीं उठत

जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद

प्रदर्शन के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर जंतर-मंतर के 1.5 किलोमीटर दायरे में शाम 4 बजे से रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

वहीं आरजेडी सांसद संजय यादव ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक के मामले सामने आए, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग दोहराई।

मुरली मनोहर जोशी ने भी जताई चिंता

इस बीच भाजपा मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों के आंदोलन को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देशभर से आए छात्रों की चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस पूरे मुद्दे का समाधान संवेदनशीलता, संवाद और दूरदर्शिता के साथ निकाला जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं और युवतियों पर कथित बल प्रयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे घटनाक्रम समाज में गलत संदेश देते हैं।

पेपर लीक को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच अब संसद से लेकर सड़कों तक बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष दोनों के अगले कदमों पर देश की नजर रहेगी