रायपुर – आम बिजली उपभोक्ता का बिल एक-दो महीने तक बकाया रहने पर बिजली कंपनी कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू कर देती है, लेकिन सरकारी विभागों पर महीनों से लंबित करोड़ों रुपये के बिजली बिल के बावजूद उन्हें केवल नोटिस जारी किए जाते हैं। विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया है कि जून 2026 तक प्रदेश के शासकीय विभागों, निगमों, मंडलों और आयोगों पर बिजली बिल का ₹3035.37 करोड़ प्रावधिक बकाया है।
यह जानकारी पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश के अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी। विधायक ने विभागवार बकाया राशि के साथ यह भी पूछा था कि बिजली बिल नहीं चुकाने पर कनेक्शन काटने की क्या निर्धारित प्रक्रिया है।
सरकार के जवाब के अनुसार, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सबसे बड़ा बकायेदार है। इस विभाग पर ₹1525.18 करोड़ का बिजली बिल बकाया है, जो कुल बकाया राशि का लगभग आधा हिस्सा है। दूसरे स्थान पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग है, जिस पर ₹1057.56 करोड़ का बकाया दर्ज है। इन दोनों विभागों पर ही कुल बकाया का करीब 85 प्रतिशत केंद्रित है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जल प्रदाय, अस्पताल, स्कूल शिक्षा और सड़क प्रकाश व्यवस्था जैसी आवश्यक जनसेवाओं से जुड़े सरकारी कनेक्शनों को बकाया होने पर तत्काल नहीं काटा जाता। ऐसे मामलों में पहले संबंधित विभागों को भुगतान के लिए नोटिस जारी किए जाते हैं ताकि सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित न हों।
विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 42 शासकीय विभागों के 1,57,341 बिजली कनेक्शनों पर कुल ₹3035.37 करोड़ का प्रावधिक बकाया दर्ज है।
सबसे ज्यादा बकाया वाले विभाग
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग – ₹1525.18 करोड़
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग – ₹1057.56 करोड़
सबसे कम बकाया वाले विभाग
आरडीए – ₹0.01 करोड़
नया रायपुर (स्मार्ट सिटी) – ₹0.01 करोड़
वित्त विभाग – ₹0.22 करोड़
योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग – ₹0.23 करोड़
सुशासन एवं अभिसरण विभाग – ₹0.27 करोड़
श्रम विभाग – ₹0.29 करोड़






