बिलासपुर – छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने वाट्सएप पर अश्लील वीडियोकॉल कर लोगों को ब्लैकमेल करने और लाखों रुपये ऐंठने वाले अंतरराज्यीय सेक्स्टार्शन गिरोह के एक आरोपी की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच ने अपराध की गंभीरता और ठगी के तौर-तरीकों को देखते हुए उत्तर प्रदेश के रहने वाले आरोपी पंकज कौशिक को राहत देने से साफ इंकार कर दिया।
मामला छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का है। 21 मई 2023 को बैकुंठपुर निवासी शिकायतकर्ता को वाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से वीडियोकॉल आया। रिश्तेदार का काल समझकर जैसे ही पीड़ित ने कॉल रिसीव किया, स्क्रीन पर एक न्यूड लड़की दिखाई दी। पीड़ित ने तुरंत फोन काटकर चैट डिलीट कर दी। कुछ ही देर बाद उसी नंबर से मैसेज आया। वीडियो कॉलर ने स्क्रीनशॉट भेजकर 50,000 रुपये की मांग की। अगले दिन गिरोह के अन्य सदस्यों का धमकी भरा कॉल आने लगा, बोलने लगे, यदि रुपए नहीं दिए तो फोटो को यूट्यूब पर अपलोड कर देंगे। पीड़ित को डराने के लिए गिरोह के सदस्यों ने पीड़ित से झूठ बोला, जिस लड़की से उसने बात की थी, उसने छत से कूदकर खुदकुशी की कोशिश की है और उसके इलाज के लिए 2.50 लाख रुपये चाहिए। बदनामी के डर से पीड़ित ने अलग-अलग तारीखों में गिरोह के बताए गए यस बैंक और एसबीआई खातों में कुल 31 लाख 24 हजार 514 रुपये जमा कर दिया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने बैकुंठपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपी पंकज कौशिक (28 वर्ष, हाथरस, उत्तर प्रदेश) की ओर से अधिवक्ता ईश्वर जायसवाल ने कोर्ट में पैरवी करते हुए कहा, याचिकाकर्ता इस अपराध में सीधे तौर पर शामिल नहीं था। उसे केवल इसलिए आरोपी बनाया गया है क्योंकि सह-आरोपी अक्षय कुमार ने उसके बैंक खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। वह खेती-किसानी करता है और उसे झूठा फंसाया गया है।
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए गर्वनमेंट एडवोकेट संघर्ष पांडे ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि पीड़ित ने शिकायत में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि आरोपी ने पैसे जमा कराने के लिए उसे डराया-धमकाया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी पंकज के खाते में ठगी के 10 लाख रुपये जमा होने के पुख्ता दस्तावेजी सबूत जुटाए हैं। गर्वनमेंट एडवोकेट ने कहा, संगठित गिरोह के अन्य सह-आरोपियों मकसूद, अक्षय कुमार और किशन कुमार की जमानत याचिका को हाई कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी हैं।
याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और जिस सुनियोजित तरीके से इस गंभीर साइबर अपराध को अंजाम देकर पीड़ित से लाखों रुपये ठगे गए हैं, उसे देखते हुए याचिकाकर्ता को नियमित जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।






