सुकमा – बस्तर वन मंडल के अंतर्गत माचकोट परिक्षेत्र में सुकमा जिले से आए 12 आरोपियों के खिलाफ अतिक्रमण की कार्रवाई की गई है। इन पर भारतीय वन अधिनियम 1927 तथा लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 की सुसंगत धाराओं के अधीन कार्यवाही की गई है। आरोपियों को वन अपराध दर्ज कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदलपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायालय के आदेशानुसार सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय जेल जगदलपुर भेजा गया। कार्यवाही में मुख्य रूप से परिक्षेत्र सहायक बनसिंह कर्मा एवं माचकोट परिक्षेत्र के परिसर रक्षों और क्षेत्रीय स्टाफ एवं वन सुरक्षा श्रमिकों का विशेष सहयोग रहा। माचकोट के परिक्षेत्र अधिकारी प्रकाश देहारी ने कहा कि इस प्रकरण में आरोपियों द्वारा वन भूमि को खंडित कर अतिक्रमण करने का प्रयास किया गया है। लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम तथा भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही कार्यालय के आदेशानुसार न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। भविष्य में भी ऐसे आरोपियों के विरुद्ध इस प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों द्वारा वन भूमि को खंडित कर अतिक्रमण करने का प्रयास किया गया वन सुरक्षा पर जारी रहेगी।
एस.डी.ओ.जगदलपुर के एसडीओ योगेश कुमार रात्रे ने बताया कि विभाग वन अपराध के संबंध में जागरूकता फैला रहा है। वन अपराध कर वनों को क्षति पहुंचाने के दूरगामी परिणाम होते हैं। सभी अपराधियों को विधि अनुसार कार्यवाही कर जेल दाखिला कराया गया है। आगे भी वन सुरक्षा के लिए इस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।कठोर कार्रवाई की जाएगी – डीएफओ डीएफओ उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया वन सुरक्षा सभी के लिए आवश्यक है। वनों से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है इस प्रकार के अपराध में लिप्त कार्यों पर विरुद्ध विधि सम्मत से कठोर कार्रवाई की जाएगी। घर दें सूचना मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार तिवारी ने वन सुरक्षा को लेकर कहा कि वनों की सुरक्षा के लिए विभाग सदैव तत्परता से कार्य कर रहा है। मैदानी अमले की मुस्तादी से इस प्रकार के अपराध को रोकने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। क्षेत्रवासियों से कहा कि वन सुरक्षा के लिए आगे आकर बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, कहीं वन अपराध घटित हो तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें।






