देवघर – भारतीय धर्म और पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है. उनकी विश्राम अवधि है, जिसे योग निद्रा कहा जाता है. भगवान विष्णु पूरे चार महीने योग निद्रा में रहते हैं. जिसे चातुर्मास भी कहते हैं. इस दौरान देशभर में सभी तरह के मांगलिक कार्य बंद रहते हैं. वहीं चातुर्मास के दौरान सृष्टि की देखभाल का कार्य कौन करता है. यह हमेशा से ही एक जिज्ञासा का विषय रहा है. आइए जानते हैं कि इस विषय पर देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य ने क्या बताया है.
देवघर के पागल बाबाआश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि भगवान विष्णु साल में चार महीने देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक एकादशी तक योग निद्रा में रहते हैं. इसे ‘चातुर्मास’ कहा जाता है. यह अवधि आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होती है और कार्तिक शुक्ल एकादशी को समाप्त होती है. इस वर्ष, यह अवधि 20 जुलाई 2024 से 12 नवंबर 2024 तक रहेगी.
क्या है चातुर्मास का महत्व
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, चातुर्मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत बड़ा है. चतुर्माश के दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार के रूप में पाताल लोक में रहते हैं.
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, चातुर्मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत बड़ा है. चतुर्माश के दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार के रूप में पाताल लोक में रहते हैं.
आखिर क्यों रहते हैं भगवान विष्णु चार महीने पाताल लोक
एक बार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि की परीक्षा लेने धरती पर आए. राजा बलि से तीन पग की धरती मांगी. प्रभु ने दो पग में आकाश और पृथ्वी नाप ली. राजा बलि ने तीसरा पग अपने सर पर रखने को कहा, तब भगवान विष्णु बेहद प्रसन्न हुए और राजा बलि की भक्ति और उदारता देख वर मांगने को कहा. राजा बलि ने भगवान से प्रार्थना किया कि वह हमारे साथ पाताल लोक में रहे और भगवान विष्णु राजा बलि के साथ पाताल लोक में रहने लगे. तभी माता लक्ष्मी ने राजा बलि को भाई मानकर राखी बांधी और भगवान विष्णु को आजाद करने की प्रार्थना की. भगवान विष्णु किसी भक्त को निराश नहीं करते हैं, इसलिए भगवान विष्णु ने कहा कि 4 महीने हरिशयन एकादशी से लेकर कार्तिक एकादशी तक में पाताल लोक में ही रहूंगा.
एक बार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि की परीक्षा लेने धरती पर आए. राजा बलि से तीन पग की धरती मांगी. प्रभु ने दो पग में आकाश और पृथ्वी नाप ली. राजा बलि ने तीसरा पग अपने सर पर रखने को कहा, तब भगवान विष्णु बेहद प्रसन्न हुए और राजा बलि की भक्ति और उदारता देख वर मांगने को कहा. राजा बलि ने भगवान से प्रार्थना किया कि वह हमारे साथ पाताल लोक में रहे और भगवान विष्णु राजा बलि के साथ पाताल लोक में रहने लगे. तभी माता लक्ष्मी ने राजा बलि को भाई मानकर राखी बांधी और भगवान विष्णु को आजाद करने की प्रार्थना की. भगवान विष्णु किसी भक्त को निराश नहीं करते हैं, इसलिए भगवान विष्णु ने कहा कि 4 महीने हरिशयन एकादशी से लेकर कार्तिक एकादशी तक में पाताल लोक में ही रहूंगा.
भगवान शिव पर आती है सारी जिम्मेदारी
भगवान विष्णु के योग निद्रा में रहने का अर्थ यह है कि इस दौरान सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव के परिवार पर आ जाती है. पंडित नन्द किशोर मुदगल ने समझाया कि भगवान शिव के परिवार भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश भगवान और कार्तिकेय इस अवधि में विशेष रूप से सक्रिय रहते हैं और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से सृष्टि की रक्षा करते हैं.
भगवान विष्णु के योग निद्रा में रहने का अर्थ यह है कि इस दौरान सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव के परिवार पर आ जाती है. पंडित नन्द किशोर मुदगल ने समझाया कि भगवान शिव के परिवार भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश भगवान और कार्तिकेय इस अवधि में विशेष रूप से सक्रिय रहते हैं और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से सृष्टि की रक्षा करते हैं.
कौन चलता है सृष्टि?
भगवान विष्णु 4 महीना सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक योग निद्रा में रहते हैं. जब भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, तो सृष्टि का संचालन भगवान शिव के परिवार के द्वारा किया जाता है.
भगवान विष्णु 4 महीना सावन, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक योग निद्रा में रहते हैं. जब भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, तो सृष्टि का संचालन भगवान शिव के परिवार के द्वारा किया जाता है.
1.भगवान शिव: सृष्टि के संहारक के रूप में, शिव इस अवधि में विशेष रूप से सक्रिय रहते हैं. वे नकारात्मक शक्तियों का विनाश करते हैं और संतुलन बनाए रखते हैं. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित रहता है. इसलिए सावन का महीना भगवान शिव चलाते हैं.
2. भाद्रपद का महीना भगवान गणेश को समर्पित रहता है. यह महीना भगवान गणेश संचालन करते हैं. इस महीने में भगवान गणेश की पूजा आराधना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है.
3.मां पार्वती : चातुर्मास का तीसरा महीना यानी अश्विन के महीने में मां पार्वती के रूप में मां दुर्गा , विशेष रूप से सक्रिय रहती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं. वे भगवान विष्णु की अनुपस्थिति में ऊर्जा और शक्ति का संचार करती हैं. इस महीने में नवरात्रि जैसे त्यौहार मनाया जाते हैं.
4. चातुर्मास का चौथा: कार्तिक का महीना भगवान कार्तिकेय को समर्पित रहता है. इसलिए चातुर्मास का चार महीना भगवान शंकर का परिवार पूरी सृष्टि को संचालित करता है.






