Home देश पेट्रोल के दाम 100 रुपये पार: जानिए आपके घर के मंथली बजट...

पेट्रोल के दाम 100 रुपये पार: जानिए आपके घर के मंथली बजट पर कितना बढ़ेगा बोझ, कैसे होगा मैनेज?

42
0
भारत में करीब 4 साल की लंबी स्थिरता के बाद अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो चुकी है. पिछले 10 दिनों में 4 बार कीमतें बढ़ चुकी हैं. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल 100 रुपये के पार पहुंच चुका है. क्या इस बढ़ोतरी से सिर्फ गाड़ी चलाना महंगा होगा या आपके घर का पूरा राशन भी महंगा होने जा रहा है? डीजल के दाम बढ़ने से मालभाड़े पर क्या असर पड़ेगा और रिजर्व बैंक के मुताबिक इससे देश में महंगाई कितनी बढ़ेगी? जानिए कैसे यह बदलाव आपके मंथली बजट को पूरी तरह प्रभावित करने वाला है…
नई दिल्ली – भारत के पेट्रोल पंपों पर पिछले 49 महीनों (करीब 4 साल) से पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर थीं. कोई बदलाव नहीं हुआ था. लेकिन कीमतों के न बदलने रहने का रिकॉर्ड 15 मई 2026 को टूट गया. सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में सीधे ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन  भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम तीनों कंपनियां मिलकर भारत के 90% से ज्यादा पेट्रोल पंप चलाती हैं. इस पहली बढ़ोतरी के बाद कुछ ही दिनों के भीतर तीन बार और दाम बढ़ाए गए हैं. चौथी बार आज हुआ है. पेट्रोल ₹2.61 बढ़े तो डीजल 2.71 रुपये महंगा हो गया है. इस कीमत वृद्धि ने आम परिवारों को इस चिंता में डाल दिया है कि उनके महीने का बजट अब कितना बिगड़ने वाला है. क्या आप भी इसी परेशानी में हैं तो हम आपको पूरी डिटेल देते हैं.
दाम बढ़ने के बाद अब देश के बड़े शहरों में कीमतें आसमान छू रही हैं. दिल्‍ली में अब पेट्रोल की कीमत भी अब 2.61 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ 99.51 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गई है. इसी तरह डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर से 2.71 रूपये महंगा होकर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है. सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, दिल्ली और आसपास के इलाकों (NCR) में सीएनजी (CNG) के दाम भी इतिहास में पहली बार 80 रुपये प्रति किलोग्राम के पार चले गए हैं. इससे रोज आने-जाने वाले आम लोगों और ऑटो-टैक्सी चालकों की परेशानी बढ़ना तय है.
पेट्रोल हुआ महंगा
ईंधन महंगा होने का सबसे पहला और सीधा असर गाड़ी चलाने के खर्च पर पड़ता है. मान लीजिए एक आम शहरी परिवार में एक कार या दो मोटरसाइकिल हैं और महीने में लगभग 40 लीटर पेट्रोल की खपत होती है. ऐसे में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से उनके महीने का खर्च 200 रुपये बढ़ जाएगा. साल भर के हिसाब से देखें तो यह करीब 2,400 रुपये का अतिरिक्त बोझ होगा. लेकिन जो लोग अपनी गाड़ी से रोज लंबी दूरी तय करके ऑफिस जाते हैं, उनका खर्च बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, सिर्फ 3 रुपये की शुरुआती बढ़ोतरी से ही रोज सफर करने वालों का मंथली खर्च 900 से 1,500 रुपये तक बढ़ सकता है. इस हिसाब से रोजाना सफर करने वालों को अपने ट्रैवल बिल में कम से कम 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना चाहिए. इसके अलावा आम जनता पर काफी असर पड़ने वाला है, जैसे कि-
  • कैब बुकिंग ऐप्स: तेल महंगा होने के कारण ड्राइवरों की कमाई पर असर पड़ रहा है, इसलिए कंपनियां किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं.
  • फूड डिलीवरी ऐप्स: डिलीवरी पार्टनर्स के बढ़ते खर्च को संभालने के लिए खाना डिलीवर करने वाले ऐप्स डिलीवरी चार्ज बढ़ा सकते हैं.
  • टूर ऑपरेटर्स: गर्मियों की छुट्टियों के सीजन को देखते हुए टूर ऑपरेटर्स प्राइवेट टैक्सियों और बसों का किराया बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.
  • हवाई सफर: एविएशन टरबाइन फ्यूल की कीमतें बढ़ने से घरेलू उड़ानों के टिकट महंगे होने की आशंका है. जानकारों ने पहले से टिकट बुक करने की सलाह दी है.
इस महंगाई का असर सिर्फ उन लोगों पर नहीं पड़ता, जिनके पास अपनी गाड़ी है, बल्कि इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर होता है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल  दूसरे देशों से खरीदता है और हम दुनिया में तेल का इस्तेमाल करने वाले तीसरे सबसे बड़े देश हैं. हमारे देश में कुल पेट्रोल-डीजल की खपत का 60% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ दोपहिया वाहनों (बाइक और स्कूटर) में जाता है. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई रिकॉर्ड कमजोरी और महंगे आयात के कारण देश का ऑयल बिल बहुत बढ़ गया है. पिछले कई सालों से सरकार और तेल कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च का बोझ खुद उठा रही थीं, लेकिन अब इसे धीरे-धीरे ग्राहकों पर ट्रांसफर किया जा रहा है.
अर्थव्यवस्था के लिहाज से पेट्रोल से ज्यादा दर्दनाक डीजल का महंगा होना है, क्योंकि देश में कुल ईंधन की खपत का 40% हिस्सा डीजल ही है. डीजल से ट्रक, बसें, खेती के पंप, जनरेटर और फैक्ट्रियां चलती हैं. जब डीजल महंगा होता है, तो ट्रकों का भाड़ा यानी फ्रेट रेट बढ़ जाता है. मालभाड़ा बढ़ने का मतलब है कि मंडी से आपके घर तक आने वाली हर चीज महंगी हो जाएगी, फिर चाहे वो सब्जियां और दूध हो या सीमेंट, स्टील और रोजमर्रा का दूसरा सामान.
जानकारों का मानना है कि अगर तेल के दाम ऐसे ही ऊपर रहे, तो बड़े शहरों में सामान पहुंचाने और लॉजिस्टिक्स का खर्च 5 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि तेल के दामों में 1 रुपये की बढ़ोतरी होने पर माल ढुलाई का खर्च करीब 1 से 2 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. इसका मतलब है कि अब तक जो बढ़ोतरी हुई थी, उसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप पर ही नहीं, बल्कि जुलाई और अगस्त 2026 तक आपके घर के राशन और फैक्ट्रियों के सामान पर भी दिखने लगेगा.
आपस में क्या कनेक्शन?
अक्सर लोग सोचते हैं कि पेट्रोल महंगा होते ही अगले दिन से ही दाल-चावल और सब्जियों के दाम बढ़ जाएंगे, लेकिन इसका गणित थोड़ा अलग है. सरकारी आंकड़ों में महंगाई नापने के लिए जिस कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (Consumer Price Index) का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें पेट्रोल-डीजल का सीधा हिस्सा सिर्फ 2.34 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि तेल महंगा होने से सरकारी महंगाई के आंकड़े तुरंत बहुत ज्यादा नहीं बदलते. अप्रैल 2026 में देश की रिटेल महंगाई दर 3.48 प्रतिशत पर थी, जो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) के तय दायरे के अंदर थी, और यह तब का आंकड़ा है जब तेल के दाम नहीं बढ़े थे.
लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता है, जिसे एक्सपर्ट्स सेकंड-राउंड इफेक्ट कहते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के मॉडल बताते हैं कि जब भी कच्चे तेल के दाम 10 प्रतिशत बढ़ते हैं, तो देश की मुख्य महंगाई दर में करीब 0.20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाती है. जब तेल महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्ट, खेती की लागत, फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान और हवाई जहाज के टिकट जैसी पूरी सप्लाई चेन महंगी हो जाती है. धीरे-धीरे कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, जिससे उन परिवारों के लिए भी दूध, सब्जियां और पैकेट बंद सामान महंगे हो जाते हैं जो कभी पेट्रोल पंप पर कदम भी नहीं रखते.
होलसेल प्राइस इंडेक्स जो थोक बाजार के दामों को मापता है, उसमें ईंधन का हिस्सा 13.15 प्रतिशत है. अप्रैल 2026 में खुदरा दाम बढ़ने से पहले ही थोक बाजार में ईंधन की कीमतें करीब 24.71 प्रतिशत बढ़ चुकी थीं और कच्चा तेल सालभर पहले के मुकाबले 80 प्रतिशत से ज्यादा महंगा हो चुका था. आमतौर पर तेल के झटके का पूरा असर आम बाजार तक पहुंचने में 2 से 3 महीने का समय लगता है.
अपने घर के बजट को अब कैसे संभालें?
इस बढ़ते खर्च को हम अलग-अलग परिवारों के उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए छोटे शहर (Tier-2 सिटी) में रहने वाला एक मध्यमवर्गीय परिवार है, जो रोज आने-जाने के लिए सिर्फ एक मोटरसाइकिल का इस्तेमाल करता है और महीने में 15 से 20 लीटर पेट्रोल खर्च करता है. 7 रुपये दाम बढ़ने से उनका सीधा खर्च लगभग 100 से 140 रुपये महीना बढ़ेगा. यह देखने में भले ही कम लगे, लेकिन जब इसके साथ ऑटो का बढ़ा हुआ किराया और महंगी सब्जियां जुड़ेंगी, तो बजट बिगड़ने लगेगा. वहीं बड़े शहर के एक ऐसे परिवार की बात करें जिसके पास एक कार और एक बाइक है और महीने का खर्च 50 से 60 लीटर पेट्रोल है, तो उनका खर्च 350 से 420 रुपये महीना बढ़ जाएगा. इसके साथ ही ऑनलाइन डिलीवरी और राशन का बढ़ा हुआ खर्च अलग से होगा.
चिंता की बात यह है कि यह महंगाई ऐसे समय पर आई है, जब रुपया पहले से कमजोर है और खाने-पीने की चीजें भी महंगी हैं. करीब 4 साल तक अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से बचे रहने के बाद, अब अचानक लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है. परिवारों को अब अपने मंथली बजट का नए सिरे से हिसाब लगाना होगा और कई लोगों को अपने शौक या गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ेगी या अपनी बचत में से पैसे निकालने होंगे.
एनर्जी सेक्टर की रिसर्च फर्म केपलर ने तो भारत में ईंधन की मांग के अनुमान को 40 प्रतिशत तक घटा दिया है, जिसका मतलब है कि महंगे तेल की वजह से लोगों ने गाड़ियों का इस्तेमाल कम करना शुरू कर दिया है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश के नागरिकों और सरकारी विभागों से अपील की है कि वे गैर-जरूरी यात्राएं कम करें, ईंधन बचाएं और जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम  को बढ़ावा दें. प्रधानमंत्री की यह सलाह यह इशारा करती है कि कीमतों में हुआ यह बदलाव कुछ दिनों का झटका नहीं है, बल्कि अब भारतीय परिवारों को लंबे समय तक महंगे ईंधन के साथ ही तालमेल बिठाना होगा.
पेट्रोल एक बार फिर ₹100 के पार चला गया है, तो क्या आपको परेशान होना चाहिए?
घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अपने खर्चों पर ध्यान देना जरूरी है. पेट्रोल पर 7 से 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से एक आम परिवार का केवल तेल का मंथली खर्च इतना ज्यादा नहीं बढ़ने वाला कि आप उसे मैनेज न कर पाएं. असली चिंता तेल की कीमत बढ़ने से दूसरे खर्चों जैसे कैब-ऑटो का किराया, सब्जी-राशन के दाम और ऑनलाइन डिलीवरी फीस को लेकर है, इसलिए अभी से अपने बजट को थोड़ा संभालना शुरू कर दें.
रोज ट्रैवल करने वाले लोगों का महीने का पेट्रोल का बिल कितना बढ़ सकता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन सी गाड़ी चलाते हैं और कितना चलते हैं. बाइक या स्कूटर से रोज ऑफिस जाने वालों का खर्च महीने में करीब 100 से 140 रुपये बढ़ेगा, जबकि कार चलाने वालों का खर्च 350 से 420 रुपये महीना तक बढ़ सकता है. हालांकि, जो लोग बहुत लंबी दूरी तय करते हैं, उन्हें अपने ट्रैवल बिल में कम से कम 900 से 1,500 रुपये तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से हमेशा देश में महंगाई बढ़ती है?
हां, समय के साथ महंगाई जरूर बढ़ती है क्योंकि हमारे देश में ज्यादातर सामान ट्रकों से ही एक जगह से दूसरी जगह जाता है जो डीजल से चलते हैं. जब डीजल महंगा होता है तो मालभाड़ा बढ़ जाता है, जिससे मंडी आने वाली सब्जियां, दूध, फल और फैक्ट्रियों में बनने वाला सामान अपने आप महंगा हो जाता है. रिजर्व बैंक के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 प्रतिशत की तेजी से देश की सामान्य महंगाई दर में करीब 0.20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है.
आने वाले हफ्तों में आम लोगों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
सबसे पहले इस बात पर ध्यान दें कि क्या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम हो रहे हैं, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में भारत में भी कीमतें घट भी सकती हैं. दूसरी बात यह कि तेल कंपनियां अभी भी हर दिन भारी घाटा उठा रही हैं, इसलिए सरकार आगे चलकर कीमतें और बढ़ाती है या राहत देती है, यह देखना होगा. इसके अलावा, जुलाई और अगस्त के महीनों में राशन और सब्जियों की कीमतों पर नजर रखें कि ट्रांसपोर्ट महंगा होने का इन पर कितना असर पड़ा है.