Home देश खुद की जमीन, पक्की रजिस्ट्री… फिर भी 30 साल से अंधेरे की...

खुद की जमीन, पक्की रजिस्ट्री… फिर भी 30 साल से अंधेरे की सजा! इस बेबसी का जिम्मेदार कौन?

55
0

 पाली जिले के उतवन गांव में 12 परिवार पिछले करीब 30 वर्षों से बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि पड़ोस की विवादित जमीन के कारण प्रशासन ने उनके बिजली कनेक्शन रोक रखे हैं, जबकि उनका उस विवाद से कोई संबंध नहीं है. बार-बार आवेदन और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. हालात इतने खराब हैं कि परिवारों को अंधेरे में जीवन बिताना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो वे न्याय के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

पाली – ढलती हुई शाम हो, सूरज डूब रहा हो और आपके देखते ही देखते आपके आसपास के सारे घर, पूरा गांव रोशनी से जगमगा उठे. हर घर की खिड़की से उजाला बाहर छलक रहा हो. लेकिन उस पूरे उजाले के बीच एक ऐसा घर हो, जहां सिर्फ अंधेरा पसरा हो. एक बुजुर्ग महिला रोज शाम को पड़ोस के घरों की रोशनी को टकटकी लगाकर देखती हैं, इस उम्मीद में कि शायद आज उनके घर का अंधेरा भी दूर हो जाएगा. फिर एक ठंडी आह भरकर वह चुपचाप अंधेरे कोने में बैठ जाती हैं.
यह हकीकत है पाली जिले के उतवन गांव की, जहां विकास और सुविधाओं के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन एक परिवार पिछले 30 वर्षों से बिजली कनेक्शन के इंतजार में जिंदगी गुजार रहा है. इतना ही नहीं, इस परिवार को पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. मजबूरी ऐसी है कि जहां पशु पानी पीते हैं, वहीं से पानी भरकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है.
“जहां बुलाओगे वहां आएंगे, बस हमें बिजली दिलवा दो साहब”
यह दर्द उन पीड़ित परिवारों का है, जो बुनियादी सुविधाओं के लिए तीन दशकों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. सबसे हैरानी की बात यह है कि इन परिवारों को सजा किसी और के जमीन विवाद की मिल रही है. ग्रामीणों के अनुसार उनके घरों के पास काका-भतीजे के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा है. इसी विवाद के चलते प्रशासन ने क्षेत्र के 12 परिवारों के बिजली कनेक्शन पर रोक लगा रखी है, जबकि इन परिवारों का उस विवादित जमीन से कोई संबंध नहीं है.
दूसरों के जमीन विवाद की सजा भुगत रहे मासूम
ग्रामीण समंदर नाथ ने बताया कि उनका विवादित जमीन से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उन्हें बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा रहा. उन्होंने कहा कि पिछले सात महीनों में वह तीन बार बिजली विभाग में आवेदन जमा करा चुके हैं. एईएन से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक कई बार गुहार लगा चुके हैं. नेताओं और जनप्रतिनिधियों से भी मिले, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं. न्याय की उम्मीद में अब वह जयपुर जाकर अधिकारियों से मिलने की तैयारी कर रहे हैं.
बिजली तो दूर, पशुओं की ओखली से पानी पीने को मजबूर
गांव के हड़मान नाथ ने बताया कि इलाके में पीने के पानी का भी गंभीर संकट है. अधिकांश होड़ (जलकुंड) सूख चुके हैं और पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं बचा है. हालात इतने खराब हैं कि कई परिवारों को पशुओं के लिए बनाई गई ओखलियों से पानी भरकर पीना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनका जीवन और अधिक कठिन हो जाएगा.