Home धर्म - ज्योतिष ब्रह्मांड के प्रथम संवाददाता देवर्षि नारद की जयंती – जानें 2026 में...

ब्रह्मांड के प्रथम संवाददाता देवर्षि नारद की जयंती – जानें 2026 में क्या है शुभ मुहूर्त और क्यों खास है इस बार की पूजा

26
0

ब्रह्मांड के पहले ‘इंफॉर्मेशन ऑफिसर’ देवर्षि नारद की 5 अनसुनी गाथाएं

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को देवर्षि नारद का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। देवलोक से लेकर पृथ्वी लोक तक संवाद की कड़ी जोड़ने वाले नारद मुनि को न केवल देवताओं का संदेशवाहक, बल्कि सृष्टि का पहला पत्रकार भी माना जाता है।

 पंचांग गणना के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 1 मई 2026 की रात 10:52 बजे से शुरू हो रही है। यह तिथि 3 मई 2026 की रात 12:49 बजे तक प्रभावी रहेगी। हालांकि हिंदू परंपरा में उदया तिथि को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए इस वर्ष नारद जयंती 2 मई 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:38 बजे होगा, जो पूजा और व्रत के आरंभ के लिए शुभ माना जाता है। वहीं सूर्यास्त शाम 6:57 बजे रहेगा।

नारद जयंती शुभ मुहूर्त और चौघड़िया
नारद जयंती के दिन शुभ कार्यों के लिए कई अनुकूल मुहूर्त बन रहे हैं।
लाभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 8:58 बजे से रात 10:38 बजे तक
शुभ चौघड़िया मुहूर्त: शाम 6:57 बजे से रात 8:17 बजे तक

इस दौरान पूजा, जप और धार्मिक अनुष्ठान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

नारद जयंती के दिन करें ये काम
नारद जयंती के दिन भगवान विष्णु की पूजा, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करने की परंपरा है। विशेष रूप से “नारायण-नारायण” का जप करना शुभ माना जाता है।

नारद मुनि ज्ञान और भक्ति के प्रतीक
शास्त्रों की मानें तो नारद जी को ब्रह्मा जी के सात मानस पुत्रों में से एक माना गया है। नारद जी हाथ में वीणा लिए हुए हैं। वह जगत के पालनहार भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उनको तीनों लोकों में वायु मार्ग के द्वारा आने-जाने का वरदान मिला हुआ था इसलिए वह विष्णु जी की महिमा का बखान तीन लोकों में किया करते थे। इसी कारण उन्हें तीनों लोकों की खबर रहती थी। यही वजह है कि उन्हें सृष्टि का पहला पत्रकार भी माना जाता है। उन्होंने कठिन तपस्या के द्वारा ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया था।

मान्यता है कि नारद जयंती के दिन देवर्षि नारद की आराधना करने से जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन सदैव सुखमय रहता है। जो लोग पत्रकारिता की लाइन में हैं या फिर पत्रकारिता में दिलचस्पी रखते हैं। उन्हें इस दिन नारद मुनि की पूजा ज़रूर करनी चाहिए। जानते हैं नारद जयंती का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि-

नारद जयंती पूजा विधि और नियम
नारद जयंती के दिन सुबह स्नान-ध्यान के बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। नारद जी का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं। नारद जी को भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है इसलिए नारद जयंती के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु की पूजा आराधना भी आप कर सकते हैं। इस दिन भगवद् गीता का पाठ करने से नारद जी की कृपा प्राप्त होती है। पूजा करते समय नारद जी को फलों और मिठाई आदि का भोग लगाना चाहिए। पूजा के अंत में नारद जी की आरती करनी चाहिए और इसके बाद प्रसाद का वितरण घर के सभी लोगों में करना चाहिए।