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होर्मुज पार करते ही समंदर में हुआ खेल, भारत आ रहे ईरानी जहाज ने लिया यूटर्न, अब चीन ले जा रहा तेल

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होर्मुज पार करते ही समंदर के बीच एक अजीब खेल हुआ है. भारत में 7 साल बाद ईरान से तेल ला रहे एक जहाज ने बीच समंदर में यूटर्न लिया है.  जी हां, भारत की ओर बढ़ रहा ईरानी तेल वाला जहाज ने अचानक अपनी दिशा बदल ली है. पहले इसकी मंजिल भारत थी, मगर अब यह चीन की ओर मुड़ गया है. अगर यह ईरानी जहाज तेल लेकर भारत पहुंचता तो लगभग सात साल बाद यह पहला ऐसा शिपमेंट होता. मगर अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित यह जहाज ईरानी कच्चा तेल ला रहा था. उसने अपनी दिशा बदलकर भारत की बजाय अब चीन की ओर रुख कर लिया है. हालांकि, यह फाइनल डेस्टिनेशन नहीं है.
शिप ट्रैकिंग फर्म केप्लर के मुताबिक, तेल ला रहे ईरानी जहाज का नाम है पिंग शुन. यह अफ्रामैक्स जहाज 2002 में बना था. इसे 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित किया गया. पहले यह भारत की तरफ बढ़ रहा था. मगर लेटेस्ट अपडेट ये है कि बीच समंदर ही इसने अपनी दिशा बदल ली है और फिलहाल चीन के डोंगयिंग की ओर जा रहा है. इस हफ्ते की शुरुआत में इस ईरानी जहाज ने भारत के पश्चिमी तट पर स्थित वडीनार पहुंचने का संकेत दिया था, लेकिन अब यह दक्षिण की ओर मुड़ गया है. हालांकि, ऐसे गंतव्य संकेत अंतिम नहीं होते और कभी भी बदल सकते हैं.
क्यों भारत के लिए अब भी संभावना
गौरतलब है कि भारत ने मई 2019 के बाद से ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीदा है. अमेरिका के प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था. अगर तेल लेकर यह ईरानी जहाज आखिरी वक्त में भारत पहुंचता है तो यह सात साल बाद पहली शिपमेंट होगी. वैसे भी यह संभव है. कारण कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल कार्गो के लिए भारत को अस्थायी छूट दी है.  मगर माना जा रहा है कि भुगतान, शिपिंग और बीमा से जुड़ी समस्याओं के कारण ऐसे सौदों में दिक्कतें आई हैं.
7 साल बाद भारत की ओर बढ़ा था जहाज
इससे पहले जहाजों की निगरानी करने वाले आंकड़ों के मुताबिक, ‘पिंग शुन’ नामक इस जहाज में लगभग छह लाख बैरल कच्चा तेल है. केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा था कि यह मई 2019 के बाद भारत को ईरानी तेल की पहली आपूर्ति हो सकती है. उन्होंने बताया कि हाल में ‘समुद्र में मौजूद’ ईरानी तेल की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा 30 दिन की छूट दिए जाने के बाद ही यह आपूर्ति संभव हुई है.
ईरानी तेल किसका, अब तक पता नहीं
हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस जहाज में मौजूद कच्चे तेल का खरीदार कौन है. शुरू में इस जहाज का गंतव्य वाडिनार में स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी थी, मगर अब यह समीकरण बदल गया है. वाडिनार बंदरगाह भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी सहित अन्य इकाइयों के लिए भी आपूर्ति का केंद्र है. भारत ने भी अब तक इस ईरानी तेल टैंकर पर कुछ नहीं बोला है.
भारत रहा है ईरानी तेल का खरीदार
भारत ऐतिहासिक तौर पर ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है. एक समय भारत के कुल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5 प्रतिशत थी. वर्ष 2018 में भारत ने प्रतिदिन करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल का आयात किया था, जो मई, 2019 तक घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. फिर ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल का आयात पूरी तरह बंद हो गया था.