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छत्तीसगढ़ में DGP-IGP सम्मेलन – अमित शाह ने आंतरिक सुरक्षा की नई रणनीतियों पर दिया जोर

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रायपुर –  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार ने देश के लिए लंबे समय से चुनौती बने तीन क्षेत्रों नक्सल प्रभावित क्षेत्र, पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में स्थायी समाधान सुनिश्चित किया है और भविष्य में ये अन्य हिस्सों की तरह सुरक्षित बन जाएंगे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सम्मेलन केवल समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा करने का मंच नहीं रह गया, बल्कि आंतरिक सुरक्षा की रणनीतियों और नीति निर्धारण का प्रमुख फोरम बन गया है। अमित शाह ने विशेष रूप से पिछले 40 वर्षों से देश के सामने खड़ी नक्सलवाद की चुनौती पर भी प्रकाश डाला।

छत्तीसगढ़ बनेगा सुरक्षित

अमित शाह ने कहा कि देश के लिए लंबे समय से चुनौती बने तीन क्षेत्रों नक्सल प्रभावित क्षेत्र, पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार ने स्थायी समाधान प्रदान किया है और भविष्य में ये देश के अन्य हिस्सों की तरह सुरक्षित बन जाएंगे। गृह मंत्री ने सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए बताया कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। इसके साथ ही तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए हैं, और नारकोटिक्स तथा भगोड़ों के खिलाफ भी कड़े कानून बनाए गए हैं। तीनों नए कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद भारत की पुलिसिंग प्रणाली दुनिया में सबसे आधुनिक और प्रभावी बन जाएगी।

नक्सलवाद मुक्त होगा भारत

अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ उठाए गए ठोस कदमों का हवाला देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले सात वर्षों में 586 ‘फोर्टिफाइड’ पुलिस स्टेशन स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि 2014 में नक्सल-प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो अब घटकर केवल 11 रह गई है। शाह ने उम्मीद जताई कि अगले डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन तक देश पूरी तरह नक्सलवाद मुक्त हो जाएगा। आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (PFI) पर प्रतिबंध और उसके ठिकानों पर छापेमारी तथा गिरफ्तारी केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय का उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बल और पुलिस तीन महत्वपूर्ण पहलुओं खुफिया जानकारी की सटीकता, लक्ष्य की स्पष्टता और कार्रवाई में तालमेल पर ध्यान केंद्रित कर कट्टरता, उग्रवाद और नारकोटिक्स के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं।

तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई

बयान के मुताबिक, गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि देश में ‘नारकोटिक्स’ और संगठित अपराध से निपटने के लिए एक ऐसा समग्र 360-डिग्री तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो मादक पदार्थ तस्करों और अपराधियों को कहीं भी पनाह न देने दे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्यों की पुलिस, राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करे और उनके सरगनाओं को जेल भेजे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तीन दिवसीय सम्मेलन शुक्रवार सुबह शुरू हुआ और यह 30 नवंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 29 और 30 नवंबर को इसमें हिस्सा लेंगे। पुलिस ने बताया कि सम्मेलन को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और क्षेत्र में दो हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

(इनपुट- भाषा)