सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद प्लेन क्रैश मामले में दिवंगत पायलट सुमित सभरवाल के पिता की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि पूरे देश में कोई नहीं मानता कि हादसे के लिए पायलट जिम्मेदार थे। SC ने निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और DGCA से जवाब मांगा है।
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 12 जून को हुए अहमदाबाद प्लेन क्रैश (विमान दुर्घटना) से जुड़े एक संवेदनशील मामले की सुनवाई की। सर्वोच्च न्यायालय ने इस दौरान दिवंगत सीनियर पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के 91 वर्षीय पिता पुष्कर सभरवाल को बड़ी राहत दी।
पुष्कर सभरवाल ने हादसे की स्वतंत्र और तकनीकी रूप से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। दरअसल, कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स, विशेष रूप से अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल, में कथित तौर पर हादसे के लिए पायलट को जिम्मेदार ठहराया गया था, जिससे आहत होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
न्यायालय ने कहा- आपको बर्डन नहीं पालना चाहिए
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पुष्कर सभरवाल के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की। बेंच ने दिवंगत पायलट के पिता को सांत्वना देते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि आपको यह बर्डन (बोझ) नहीं पालना चाहिए कि आपके बेटे को दोष दिया जा रहा है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “यह बहुत दुखद हादसा था, लेकिन पूरे देश में कोई भी यह नहीं मानता कि जून में हुए अहमदाबाद प्लेन क्रैश के लिए आपके बेटे कैप्टन सुमित सभरवाल जिम्मेदार थे। कोई भी उन पर दोष नहीं मढ़ सकता।”
जस्टिस बागची ने भी सहमति जताते हुए कहा, “अब तक पायलट के खिलाफ किसी तरह का आरोप नहीं लगाया गया है। जांच रिपोर्ट में केवल दोनों पायलट के बीच हुई बातचीत का जिक्र है, लेकिन किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है।” जस्टिस सूर्यकांत ने जोर देकर कहा कि इस हादसे की वजह चाहे जो भी रही हो, इसके पीछे पायलट की कोई गलती नहीं है।
केंद्र और DGCA को नोटिस जारी
पुष्कर सभरवाल की याचिका, जिसमें सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, DGCA (डायरेक्ट्रोट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) और संबंधित अथॉरिटीज को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 नवंबर को निर्धारित की गई है।






