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नीतीश कुमार हैं NDA के CM कैंडिडेट, BJP ने क्यों की यह घोषणा? वजह- महागठबंधन का दबाव या कुछ और

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CM: बिहार विधानसभा चुनाव में अगले सीएम कैंडिडेट को लेकर राजनीति गर्म है. महागठबंधन ने आधिकारिक तौर पर तेजस्वी यादव को अपना सीएम कैंडिडेट घोषित किया है. दूसरी तरफ एनडीए बार-बार कहता रहा है कि वह सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है. ऐसे में एनडीए की तरफ से चुनाव जीतने की स्थिति में अगला सीएम कौन होंगे? इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी. खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू में साफ किया था कि चुनाव बाद जीतकर आने वाले विधायक तय करेंगे कि अगला सीएम कौन होगा. लेकिन, ऐसा लगता है कि एनडीए, महागठबंधन के दबाव में आ गया है. महागठबंधन अपने हर चुनावी सभा में यह सवाल उठा रहा है कि एनडीए का सीएम चेहरा कौन होगा. अमित शाह के बयान और नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को मुद्दा बना रहा है. वह कह रहा है कि भाजपा यह स्पष्ट तौर पर नहीं कह रही है कि नीतीश कुमार उसके सीएम कैंडिडेट होंगे.
ऐसे में बिहार भाजपा के एक सबसे बड़े नेता और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर एनडीए की जीत होती है तो नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे. मुंगेर जिले के तारापुर सीट से चुनाव मैदान में उतरे सम्राट चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि भाजपा जल्द ही एक घोषणापत्र जारी करेगी. हम अपने सहयोगी दलों के साथ ही इसे तैयार कर रहे हैं. हम बिहार के विकास के लिए अब तक पूरा नहीं किए जा सके वादों को अगले पांच साल में पूरा करेंगे. हम बिहार में अगले पांच साल में 20 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाएंगे. हमारे पास अभी 7282 एकड़ का लैंड रिजर्व है. हमने 14000 एकड़ जमीन खरीदी है और हमारा लक्ष्य राज्य में 50 हजार एकड़ का लैंड बैंक बनाने का है.

सीएम पद की कोई वैकेंसी नहीं
एक सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारे यहां कोई वैकेंसी नहीं है. नीतीश जी सीएम हैं और आगे भी रहेंगे. वह भाजपा ही थी जिसने अक्तूबर 2005 में पहली बार नीतीश कुमार को सीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश किया. नीतीश कुमार की विचारधारा भले ही अलग है लेकिन वह एनडीए के भीतर सभी को स्वीकार्य हैं. इसमें कोई दो बात नहीं है. ये चर्चा का विषय ही नहीं है.
फिर उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार बीते 29 साल से भाजपा के साथ. बीच के कुछ समय को छोड़कर. भाजपा की बदौलत ही लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने. लालू यादव छह माह ही बदल गए. यह बात 1990 की है जब राज्य में जनता दल की सरकार बनी थी. उसे भाजपा ने समर्थन दिया था. उस वक्त लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा चल रही थी. बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद भाजपा ने जनता दल से समर्थन वापस ले लिया था. लेकिन, नीतीश कुमार भाजपा के साथ बने रहे.
सम्राट चौधरी के इस बयान के साथ ही जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी एक इंटरव्यू दिया है. उनका यह इंटरव्यू टाइम्स ऑफ इंडिया में छपा है. उसमें भी उन्होंने कहा है कि एनडीए के भीतर नीतीश कुमार को अगला सीएम बनाने को लेकर पूरी तरह सहमति है. उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार जेडीयू और भाजपा और अन्य सहयोगी दलों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है. किसी तरह का कोई खटास नहीं है.