रायपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य साक्षरता मिशन के दो सहायक संचालकों की सेवा समाप्त कर दी है। दोनों के खिलाफ अनियमितता समेत कई शिकायतें थीं। मुख्यमंत्री के पास इन दोनों की सेवावृद्धि की नोटशीट गई तो उन्होंने सर्विस कन्टीन्यू करने से इंकार कर दिया। साक्षरता मिशन के डायरेक्टर ने मुख्यमंत्री के निर्देश का हवाला देते हुए दोनों की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है।
बता दें, दोनों अधिकारियों की सेवावृद्धि की फाइल जब आगे बढ़ी, उस समय मुख्यमंत्री स्कूल शि़क्षा विभाग के भारसाधक मंत्री थे। उस समय तीन नए मंत्रियों की शपथ नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री के यहां से अभी फाइल लौटी तो पता चला कि दोनों सहायक संचालकों की सेवा समाप्त कर दी गई है।
बताते हैं, प्रशांत पाण्डेय और दिनेश कुमार टांक लंबे समय से संविदा पर राज्य साक्षरता मिशन में सहायक संचालक के पद पर कार्य कर रहे थे। दोनों के खिलाफ गंभीर अनियमितता के साथ ही कार्य में लापरवाही बरतने की शिकायतें मिल रही थीं। अफसरों का कहना है कि संविदा में किसी तरह के भत्ता की पात्रता नहीं होती। इसमें निश्चित वेतनमान मिलता है। मगर दोनों सहायक संचालकों ने डीए समेत कई तरह के भत्ते से अपना वेतन लगभग दुगुना बढ़ा लिया था। दोनों को कायदे से 56 हजार एकमुश्त वेतन मिलना चाहिए था। मगर बताते हैं, वे प्रति महीने एक लाख से अधिक वेतन आहरित कर रहे थे।
पता चला है, साक्षरता मिशन के अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री होते हैं। मंत्रियों को नियम-कायदे की डिटेल जानकारी नहीं होती थी। साक्षरता मिशन जैसे स्कूल शिक्षा विभाग में संविदा में पोस्टेड अनेक अधिकारियों, कर्मचारियों ने मंत्रियों से नोटशीट पर दस्तखत करा 80 परसेंट तक महंगाई भत्ता उठा रहे हैं। कई अधिकारी नाश्ता भत्ता, मोबाइल भत्ता तक ले रहे हैं। जबकि, वित्त विभाग के संविदा कर्मियों के नियमों के ये खिलाफ है। मोबाइल भत्ता तो रेगुलर अधिकारियों, कर्मचारियों को भी नहीं मिलता।
महंगाई भत्ता भी हाल में बढ़कर 55 परसेंट हुआ है। मगर स्कूल शिक्षा विभाग के कई बोर्ड और निगमों में अधिकारी 80 परसेंट तक महंगाई भत्ता ले रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि लिस्टिंग की जा रही है कि और कितने संविदा अधिकारी, कर्मचारी इस तरह के नियम विरूद्ध भत्ते ले रहे हैं। अफसरों ने कहा है कि दोनों सहायक संचालकों के खिलाफ पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। बहरहाल, स्कूल शिक्षा विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है।






