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पहली बार प्राइवेट नौकरी पर सरकार भी देगी पैसा – ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ पर ₹1 लाख करोड़ होंगे खर्च, जानिए कैसे मिलेगा लाभ

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79वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की शुरुआत की। इसके लिए कुल ₹99,446 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)को इसके कार्यान्वयन का जिम्मा दिया गया है।

नई दिल्ली – 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से करीब 1 लाख करोड़ की ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’की घोषणा की। इस योजना का लाभ अगले दो सालों में करीब 3.5 करोड़ लोगों को होगा, जिनमें से 1.92 करोड़ लोग पहली बार नौकरी करने वाले होंगे।

ये योजना 15 अगस्त 2025 को लागू हो गई है। इसका फायदा नौकरी पाने वाले युवाओं के साथ-साथ नौकरी देने वाली कंपनियों को भी होगा। यह 23 जुलाई को पेश किए गए 2024-25 के केंद्रीय बजट का भी हिस्सा था। इसका नाम पहले रोजगार इंसेंटिव रखा गया था, इसे ही बदल कर विकसित भारत रोजगार योजना कर दिया गया है।

योजना के मुताबिक, पहली बार प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी हासिल करने वाले युवाओं को 15000 रुपए दिए जाएँगे, ताकि उन्हें आगे बढ़ने में आसानी हो। साथ ही जो कंपनियाँ नए कर्मचारियों को नियुक्त करेगी, उन्हें आर्थिक मदद की जाएगी। ये मदद 3000 रुपए हर कर्मचारी के हिसाब से हर महीने मिलेंगे।

योजना 31 जुलाई 2027 तक लागू रहेगी। इसके लिए कुल ₹99,446 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। श्रम और रोजगार मंत्रालय के साथ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इसके कार्यान्वयन की देखरेख करेंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के साथ-साथ विनिर्माण, सेवा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा देना है।

क्या है मानदंड
  1. ईपीएफओ में पहली बार रजिस्ट्रेशन कराने वाले युवा इस योजना के पात्र हैं।
  2. 1 अगस्त 2025 से पहले ईपीएफओ या किसी दूसरे ट्रस्ट से संबद्ध नहीं होना चाहिए।
  3. कर्मचारी की सैलरी ₹1,00000 या उससे कम होना चाहिए।
  4. ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) में योगदान अगस्त 2025 या उसके बाद से शुरू होना चाहिए।
  5. कर्मचारी को कम से कम 6 महीने तक उसी कंपनी में कार्यरत रहना होगा।
मासिक आय के आधार पर आवंटन
  • यदि मासिक आय ₹10,000 है, तो व्यक्ति को अधिकतम ₹1,000 प्राप्त होंगे।
  • ₹10,000 से ₹20,000 तक के वेतन वालों को ₹2,000 मिलेंगे।
  • ₹20,000 से ₹1,00,000 के बीच के आय वालों को ₹3,000 मिलेंगे।
योजना कैसे काम करती है

प्रधानमंत्री विकास भारत रोज़गार योजना दो भागों में विभाजित है। भाग A में पहली बार नौकरी करने वालों के लिए प्रावधान है, जबकि भाग B में रोजगार देने वाली कंपनियों के लिए नियम बनाए गए हैं।

भाग A: यह उन लोगों के लिए है जो पहली बार नौकरी की तलाश में हैं और EPFO में पंजीकृत हैं। इसका फायदा दो साल में करीब 3.5 करोड़ युवाओं को होगा। इसके तहत अधिकतम सीमा ₹15,000 है, दो किश्तों में (पहली 6 महीने बाद और दूसरी 12 महीने बाद) मिलेगी। यह लाभ उन लोगों पर लागू होता है जिनकी सालाना आय ₹100000 तक है। दूसरी किश्त बचत या जमा खाते में डाली जाएगी, जिसे कर्मचारी बाद में निकाल सकते हैं, ताकि बचत की आदत को बढ़ावा मिले।

भाग B: यह हर क्षेत्र में रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने पर केंद्रित है। कंपनियों को उन कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा जिनका वेतन ₹100000 से कम है। सरकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए कंपनियों को दो वर्षों के लिए ₹3,000 प्रति माह आवंटित करेगी, बशर्ते वह कम से कम 6 महीने तक अपनी भूमिका में बना रहे। विनिर्माण उद्योग को तीसरे और चौथे वर्ष के दौरान भी यही राशि दी जाएगी।

भुगतान छह, बारह, अठारह और चौबीस महीने के लगातार रोजगार के बाद किया जाएगा। ये पैसा उस बैंक खाते में जाएगा, जो पैन से जुड़ा हो। ईपीएफओ में पंजीकृत कंपनियों को 6 महीने की अवधि के लिए कम से कम 2 नए व्यक्तियों (50 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए) या 5 नए व्यक्तियों (50 या अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए) को नियुक्त करना आवश्यक है।