यूपी राजस्व विभाग के अनुसार, उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल 2,963 वक्फ संपत्तियां ही दर्ज हैं। बाकी संपत्तियों को अवैध रूप से वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित किया गया है। बीजेपी सरकार का कहना है कि सरकारी और ग्राम समाज की जमीनें वक्फ की संपत्ति नहीं हो सकती हैं। इसके बावजूद हजारों संपत्तियों को अवैध तरीके से वक्फ घोषित कर दिया गया है
उत्तर प्रदेश – दोनों सदनों में बिल पास होने के बाद अब वक्फ बोर्ड के ऑडिट की तैयारी है। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने वक्फ बोर्ड में 1 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के गबन की आशंका जताई है।
उन्होंने कहा है कि इसे लेकर जल्द ही ऑडिट किया जाएगा। हालांकि, प्रक्रिया कब शुरू होगी, इसे लेकर उन्होंने स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा है।
अंसारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बदलते भारत की दिशा में वक्फ संशोधन एक्ट एक अहम कदम है। यह किसी सरकार की तरफ से पहली बार किया गया संशोधन नहीं है। 1954, 1995 और 2013 में भी ऐसे संशोधन किए गए हैं। मुसलमानों को यह नहीं सोचना चाहिए कि यह पहली बार हो रहा है। कई लोग वक्फ बोर्ड को धार्मिक निकाय मानते हैं। जबकि, यह प्रशासनिक निकाय है। वक्फ बोर्ड का गठन राज्य सरकार की तरफ से अलग-अलग जिलों में किया जाता है, जिसका काम कलेक्टर के पास होता है। इसमें भी कुछ नया नहीं है।’
ऑडिट की बात
अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हमारा ध्यान सभी नियमों को लागू करना है और उनमें से अधिकांश पहले भी उपलब्ध रहे हैं। ऑडिट का भी प्रावधान था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अब नए संशोधन के बाद ऑडिट को अनिवार्य किया गया है।’
उन्होंने कहा, ‘1.25 लाख वक्फ संपत्तियों की कीमत अनुमानित 1.25 लाख करोड़ रुपये है, जिसके जरिए हर साल 1200 करोड़ रुपये का राजस्व आना चाहिए। हालांकि, अभी तक सिर्फ वक्फ बोर्ड हर साल सिर्फ 150 करोड़ रुपये का राजस्व बना रहा है। इसमें करीब 1100 करोड़ रुपये का फर्क है और यह पैसा जा कहां रहा है?’
अंसारी ने कहा, ‘अगर 1100 करोड़ रुपये हर साल वक्फ के पास आ रहे होते, तो 800 स्कूल या कॉलेज खुल गए होते, जो गरीब मुसलमानों की मदद करते। करीब 200 अस्पताल खुल जाते, जो गरीबों के लिए मददगार होते। साथ ही कई कौशल केंद्र भी खोले जा सकते थे। मुझे वक्फ बोर्ड के जरिए हर साल 1100 करोड़ रुपये के गबन का संदेह हो रहा है।’
‘खास बनाम आम मुसलमान’
उन्होंने कहा, ‘यह जंग खास बनाम आम मुसलमान की है। जो लोग बिल का विरोध कर रहे हैं, इसमें उनका निजी स्वार्थ है। उन्होंने पिछड़े मुसलमानों के कल्याण से कोई लेना देना नहीं है।’
गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल को 95 के मुकाबले 128 मतों से मंजूरी दे दी। इस विधेयक के बारे में सरकार ने दावा किया कि इसके कारण देश के गरीब एवं पसमांदा मुसलमानों एवं इस समुदाय की महिलाओं की स्थिति में सुधाार लाने में काफी मदद मिलेगी।
विधेयक पर तेरह घंटे से अधिक हुई चर्चा का जवाब देते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि 2006 में 4.9 लाख वक्फ संपत्ति देश में थीं और इनसे कुल आय मात्र 163 करोड़ रुपये की हुई, वहीं 2013 में बदलाव करने के बाद भी आय महज तीन करोड़ रुपये बढ़ी। उन्होंने कहा कि आज देश में कुल 8.72 लाख वक्फ संपत्ति हैं।