बिहार में वक्फ संशोधन बिल को लेकर जारी सियासी उबाल ने अब जेडीयू की जड़ों को भी हिलाना शुरू कर दिया है। वक्फ बिल पर मोदी सरकार को समर्थन देने के बाद जदयू में अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच गहरी नाराजगी देखी जा रही है। अब मुजफ्फरपुर जिले से इस नाराजगी का पहला बड़ा असर सामने आया है, जहां जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव अफरीदी रहमान ने अपने 20 से अधिक समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव के नेतृत्व में पार्टी से अलग हुए नेताओं में मो. इमरान अली, मो. आजाद अली, मो. शमीम रहमान, मो. बबलू, राजू खान, मो. इम्तियाज, जानीसर खान, मो. छोटू, मो. अहमद, मो. विक्की, रऊफ अंसारी और दानिश इकबाल सहित कई कार्यकर्ता शामिल हैं।
‘वक्फ की जमीन बचाने की लड़ाई है, यह केवल राजनीति नहीं’
अफरीदी रहमान ने इस्तीफा देते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियां हमारे पूर्वजों की धरोहर हैं। इन संपत्तियों में मस्जिद, कब्रिस्तान, मदरसा जैसी आस्थाओं से जुड़ी चीजें आती हैं, जिन्हें आजादी से पहले वक्फ किया गया था। लेकिन केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन बिल लाकर मुसलमानों की इन संपत्तियों को हड़पने की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि जेडीयू जैसे धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले दल का इस बिल का समर्थन करना मुस्लिमों के साथ खुला धोखा है।
‘नीतीश ने हमें ठगा, अब पछतावा हो रहा है’
अफरीदी रहमान ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक जेडीयू का झंडा उठाया, लोगों के बीच पार्टी की विचारधारा का प्रचार किया। लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुस्लिम समुदाय के साथ न्याय नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमें अफसोस है कि हमने इतनी वफादारी निभाई और अंत में हमें ही धोखा मिला।
पार्टी में बढ़ता असंतोष, मुस्लिम नेताओं में गहरी नाराजगी
यह घटनाक्रम केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं है। वक्फ संशोधन बिल पर जेडीयू के रुख से मुस्लिम समुदाय के नेताओं में लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है। पार्टी से जुड़े कई अन्य जिलों के मुस्लिम कार्यकर्ता भी अपने-अपने स्तर पर विरोध दर्ज करा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में अन्य जिलों से भी इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो सकता है।
बिल पर देश भर में विरोध, पर जेडीयू का समर्थन
वक्फ संशोधन बिल को लेकर पूरे देश में मुस्लिम समुदाय द्वारा विरोध किया जा रहा है। समुदाय का आरोप है कि यह बिल मुस्लिमों की धार्मिक संपत्तियों को छीनने का रास्ता खोलता है। हालांकि केंद्र सरकार इसे ‘सुधार’ बता रही है, लेकिन विपक्ष में शामिल कई पार्टियों के साथ जेडीयू, लोजपा, हम पार्टी और दक्षिण भारत के कुछ दलों द्वारा समर्थन देने के बाद से अल्पसंख्यकों में असंतोष गहरा गया है।